प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : चंद्रपुर जिले के नकोडा गांव में पिछले लगभग 10 से 12 वर्षों से बस स्टैंड की सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों में भारी नाराज़गी देखी जा रही है। विकास, CSR और जनसेवा के बड़े-बड़े दावे करने वाले उद्योगों और नेताओं के बीच आज भी गांव के नागरिक धूप, बारिश और ठंड में सड़क किनारे खड़े होकर बस का इंतजार करने को मजबूर हैं।
गांव के विद्यार्थियों, महिलाओं, मजदूरों और बुजुर्गों को रोजाना भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल, कॉलेज, नौकरी और बाजार जाने वाले लोगों के लिए बस ही मुख्य साधन है, लेकिन बस स्टॉप तक की बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं होना प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नकोडा क्षेत्र में बड़े उद्योगों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। CSR फंड के नाम पर विकास के दावे किए जाते हैं, राजनीतिक मंचों पर घोषणाएं होती हैं, लेकिन गांव का सबसे मूलभूत मुद्दा — बस स्टैंड — आज तक अंधेरे में है। ग्रामीणों का कहना है कि कांग्रेस, भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं की गांव में लगातार सक्रियता रहती है, मगर जनता की वास्तविक समस्या अब तक जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों ने यह भी चिंता जताई कि बस स्टॉप नहीं होने के कारण सुरक्षा का गंभीर खतरा बना रहता है। सड़क किनारे हमेशा ओबी, रेती, मिट्टी और भंगार चोरी से जुड़े संदिग्ध लोगों की आवाजाही बनी रहती है। पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से खासकर महिलाओं और छात्राओं में भय का माहौल रहता है। गांव में राजनीतिक और औद्योगिक हितों को लेकर हमेशा “चूहा-बिल्ली का खेल” चलता रहता है, लेकिन आम जनता की सुविधा पर कोई ठोस कदम दिखाई नहीं देता।
नकोडा परिसर में कई बड़े औद्योगिक प्रकल्प संचालित हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने , तथा से सामाजिक उत्तरदायित्व और जनसेवा के तहत आगे आने की मांग की है।
ग्रामस्थों की मांग है कि गांव में आधुनिक सुविधाओं से लैस डिजिटल बस स्टैंड बनाया जाए, जिसमें शौचालय, बाथरूम, CCTV कैमरे, दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधा, बैठने की व्यवस्था और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध हो। उनका कहना है कि यदि उद्योग और प्रशासन वास्तव में विकास का दावा करते हैं, तो सबसे पहले जनता की मूलभूत जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए।
अब सवाल यह उठ रहा है कि करोड़ों के CSR और विकास के दावों के बीच आखिर नकोडा गांव को एक साधारण बस स्टैंड के लिए और कितने वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा?




