प्रणयकुमार बंडी
घुग्घूस/चंद्रपुर: घुग्घूस शहर में मंगलवार शाम लगभग 4 से 5 बजे के बीच एक बेहद चिंताजनक घटना सामने आई, जिसमें सड़क किनारे लोहा सीडी पर शांत बैठा एक कथित मतिमंद युवक अज्ञात हमलावर के बोतल से किए गए हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक के सिर पर गहरी चोट लगी और वह लहूलुहान हो गया। आसपास मौजूद कुछ लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए उसे तत्काल नजदीकी चिकित्सालय पहुंचाया, जहां उसका प्राथमिक उपचार किया गया। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि युवक के सिर पर कई टांके लगाए गए।
यह घटना घुग्घूस-तड़ाली मार्ग पर कृष्णा नगर के पास निर्माणाधीन पुलिया क्षेत्र के निकट हुई। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि घायल युवक मानसिक रूप से कमजोर (मतिमंद) है। आरोप है कि इसी स्थिति का लाभ उठाकर मामले को दबाने का प्रयास किया गया, जिससे कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है। लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व इसी क्षेत्र में बाहर से आए एक मजदूर पर एक महिला के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगा था। अब ताजा हिंसक घटना ने एक बार फिर क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
जिस स्थान पर यह वारदात हुई, वहां आसपास टायर पंचर की दुकानें, देशी-विदेशी शराब की दुकानें, ढाबे, किराना दुकानें, होटल, सैलून, गैरेज, चिकन सेंटर, अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान, बड़ी संख्या में आवासीय मकान तथा धार्मिक स्थल मौजूद हैं। ऐसे व्यस्त और सार्वजनिक क्षेत्र में दिनदहाड़े हुई हिंसक घटना से लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल बताया जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या चंद्रपुर पुलिस अधीक्षक और घुग्घूस पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कानून के कटघरे तक पहुंचाएंगे? क्या शहर में बढ़ती हिंसक प्रवृत्तियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जाएगा, या फिर ऐसे मामलों में ढिलाई और चुप्पी का सिलसिला जारी रहेगा?
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि इस घटना की गंभीरता से जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे अपराधियों के हौसले और बढ़ सकते हैं। इसलिए इस मामले में पारदर्शी जांच, आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी तथा संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग तेज हो रही है।
इस समाचार में कुछ तथ्य स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों से प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं। पुलिस की आधिकारिक जांच और बयान के बाद तथ्यों में परिवर्तन संभव है।




