प्रणयकुमार बंडी
घुग्घूस/चंद्रपुर: घुग्घूस शहर के प्रमुख श्री छत्रपति शिवाजी महाराज चौक के विस्तारीकरण, सौंदर्यीकरण और छत्रपति शिवाजी महाराज की आकर्षक पूर्णाकृति प्रतिमा स्थापित करने की मांग एक बार फिर स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। शहर के कुछ शिवप्रेमियों का दावा है कि वे पिछले लगभग दो वर्षों से इस मांग को लेकर संबंधित विभागों और प्रशासन के समक्ष लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक मामला मुख्य रूप से कागजी प्रक्रियाओं तक ही सीमित दिखाई दे रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह चौक शहर का अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यस्त यातायात केंद्र है। इसी मार्ग से चंद्रपुर, यवतमाल, तड़ाली तथा घुग्घूस बस स्टॉप, घुग्घूस पुलिस स्टेशन, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की पूर्णाकृति प्रतिमा, नायब तहसीलदार कार्यालय, अस्पताल, लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड, एसीसी अडानी सीमेंट कंपनी, बैंक ऑफ इंडिया, नगर परिषद कार्यालय, सीडीसीसी बैंक, विभिन्न शैक्षणिक संस्थान, मार्केट लाइन, पेट्रोल पंप सहित अनेक सरकारी, औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक आवागमन होता है। ऐसे में नागरिकों का मानना है कि इस चौक का सुनियोजित विकास न केवल शहर की सुंदरता बढ़ाएगा, बल्कि यातायात व्यवस्था को भी अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायक होगा।
इस बीच, चौक के समीप हाल ही में एक मंदिर का निर्माण पूर्ण होकर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। इसके बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा शुरू हो गई है कि यदि संबंधित क्षेत्र में आवश्यक अनुमतियों के आधार पर अन्य प्रकार का निर्माण संभव हुआ है, तो शिवाजी महाराज की पूर्णाकृति प्रतिमा के प्रस्ताव पर अब तक ठोस निर्णय क्यों नहीं लिया गया।
भूमि की स्थिति को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि संबंधित भूमि MIDC के अधिकार क्षेत्र में आती है और वहां औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े नियम लागू होते हैं। हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है कि उक्त निर्माण किन नियमों और अनुमतियों के तहत किया गया। इसलिए इस विषय में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सक्षम प्राधिकरण की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शिवप्रेमियों का कहना है कि वे मंदिर निर्माण का स्वागत करते हैं और उनकी किसी धार्मिक स्थल से कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना है कि उनकी मांग केवल इतनी है कि शासन, प्रशासन और MIDC सभी प्रस्तावों पर समान एवं पारदर्शी दृष्टिकोण अपनाएं। यदि नियमानुसार अन्य निर्माण संभव हैं, तो आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर छत्रपति शिवाजी महाराज की पूर्णाकृति प्रतिमा स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
स्थानीय नागरिकों ने शासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि श्री छत्रपति शिवाजी महाराज चौक का विस्तारीकरण, सौंदर्यीकरण तथा यातायात सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक समग्र विकास योजना तैयार की जाए। उनका मानना है कि आकर्षक चौक और पूर्णाकृति प्रतिमा शहर की ऐतिहासिक पहचान और गौरव को नई पहचान देने के साथ-साथ घुग्घूस की सुंदरता में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
फिलहाल, यह विषय स्थानीय जनचर्चा का केंद्र बना हुआ है। अब सभी की निगाहें शासन, प्रशासन और संबंधित विभागों पर टिकी हैं कि वे इस मांग पर कानूनी प्रावधानों एवं सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए क्या निर्णय लेते हैं।




