नई दिल्ली/कच्छ : देश में वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए गुजरात के कच्छ स्थित बन्नी घास के मैदानों में मध्य प्रदेश से चार अफ्रीकी चीतों को स्थानांतरित किया जाएगा। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) तथा चीता परियोजना संचालन समिति ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश में पुनर्वासित दो नर और दो मादा अफ्रीकी चीतों को कच्छ के बन्नी घास के मैदान पारिस्थितिकी तंत्र में बसाया जाएगा। इस ऐतिहासिक पहल के साथ गुजरात, मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान के बाद भारत में चीतों का दूसरा प्रमुख आवास क्षेत्र बन जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्छ का विशाल बन्नी घास क्षेत्र चीतों के लिए अनुकूल प्राकृतिक वातावरण प्रदान करता है। यहां का खुला घासयुक्त भूभाग, पर्याप्त शिकार प्रजातियां और अपेक्षाकृत कम मानव हस्तक्षेप चीतों के अनुकूल माना जा रहा है। वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञ लंबे समय से इस क्षेत्र को चीता पुनर्वास के लिए उपयुक्त मानते रहे हैं।
गौरतलब है कि भारत में चीता पुनर्स्थापन परियोजना के तहत वर्ष 2022 में नामीबिया और बाद में दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाकर मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया था। इसके बाद से केंद्र सरकार और वन्यजीव संस्थाएं देश के अन्य उपयुक्त क्षेत्रों की भी पहचान कर रही थीं।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, चीतों को अलग-अलग क्षेत्रों में बसाने से उनकी आबादी बढ़ाने, आनुवंशिक विविधता बनाए रखने और प्रजाति संरक्षण को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी। इससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी लाभ पहुंचेगा और इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
केंद्र और गुजरात सरकार इस परियोजना को लेकर विशेष तैयारियों में जुट गई हैं। बन्नी क्षेत्र में निगरानी, सुरक्षा, शिकार प्रजातियों की उपलब्धता, चिकित्सा सुविधा और वन्यजीव प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है ताकि चीतों का सुरक्षित पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके।
पर्यावरण प्रेमियों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे भारत में विलुप्त हो चुके चीतों की वापसी की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।




