प्रणयकुमार बंडी
देशभर में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (S.I.R.) अभियान का असर अब शिक्षा व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में शिक्षक और शिक्षिकाएं S.I.R. कार्य में लगाए जाने के कारण स्कूलों में नियमित शिक्षण प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय स्तर पर यह स्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि बच्चे स्कूलों में अपने शिक्षक-शिक्षिकाओं को खोज रहे हैं, जबकि शिक्षक घर-घर जाकर मतदाता सूची पुनरीक्षण के लिए लोगों की तलाश में लगे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई की भरपाई आखिर कैसे होगी और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
शहर में यह भी चर्चाएं हैं कि कुछ स्थानों पर नियमित शिक्षकों की अनुपस्थिति में बेहद कम मानदेय पर कथित के रूप में अन्य लोगों से कक्षाएं संचालित कराई जा रही हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि ऐसी शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा।
केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, नगर पंचायत, नगर परिषद और महानगरपालिका सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी एवं अधिकारी भी युद्धस्तर पर S.I.R. कार्य में जुटे हुए हैं। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में यह अभियान अभी तक पूर्ण नहीं हो सका है और बड़ी संख्या में प्रकरण लंबित बताए जा रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों का मानना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए मतदाता सूची का शुद्धीकरण आवश्यक है, लेकिन इसके साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि प्रशासनिक कार्य और शिक्षा—दोनों का संतुलन बना रहे।
https://www.facebook.com/share/r/14kSC9xE9Tv/ Read more: S.I.R. ड्यूटी का असर: स्कूलों में शिक्षक नदारद, पढ़ाई प्रभावित; जिम्मेदारी तय करने की उठी मांगअब सभी की निगाहें इस अभियान के पूर्ण होने के बाद सामने आने वाले आधिकारिक आंकड़ों और प्रशासन की अगली कार्ययोजना पर टिकी हैं।




