प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : घुग्घुस-वणी मार्ग पर स्थित वर्धा नदी किनारे सोमवार को बच्चों के कपड़े, चप्पल और अन्य सामान मिलने से जो आशंका व्यक्त की जा रही थी, वह मंगलवार को एक भयावह सच बनकर सामने आई। वर्धा नदी ने पांच परिवारों के चिराग छीन लिए। पांच युवकों के शव बरामद होने के बाद पूरे घुग्घुस क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। हर आंख नम है और हर जुबान पर एक ही सवाल है—आखिर यह दर्दनाक हादसा कैसे हुआ?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रभाग क्रमांक 07 स्थित इंदिरानगर के पांच युवक सोमवार दोपहर घर से बाहर निकले थे। देर शाम तक घर वापस नहीं लौटने पर परिजन चिंतित हो उठे और उनकी तलाश शुरू की गई। इसी दौरान वर्धा नदी किनारे बच्चों के कपड़े, जूते-चप्पल और अन्य सामान मिलने से अनहोनी की आशंका गहरा गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस, जनप्रतिनिधि, समाजसेवक तथा बड़ी संख्या में नागरिक घटनास्थल पर पहुंच गए थे।
परिजनों की बेचैनी और चिंता के बीच पूरी रात खोजबीन जारी रही। पुलिस और बचाव दल लापता युवकों की तलाश में जुटे रहे। मंगलवार सुबह चंद्रपुर से बुलाए गए विशेष बचाव दल ने वर्धा नदी में रेस्क्यू अभियान शुरू किया। सुबह करीब 7:30 बजे डब्ल्यूसीएल जल टंकी परिसर के निकट नदी में पहला शव दिखाई दिया। यह शव तन्मय नवनाथ पथाडे (17 वर्ष) का था। इसके बाद घंटों चले अभियान में रोहित बाबाराव बोबड़े (19 वर्ष), सन्नी अशोक आरपेल्ली (18 वर्ष), नकुल भास्कर केळझळकर (18 वर्ष) तथा सम्यक सोंनटक्के (17 वर्ष) के शव भी बरामद कर लिए गए।
बताया जा रहा है कि खोजबीन के दौरान वर्धा नदी के पास स्थित डब्ल्यूसीएल जल टंकी परिसर के निकट रेत में पांचों युवकों के कपड़े, जूते-चप्पल और मोबाइल फोन पड़े मिले थे। इस दृश्य ने परिजनों और उपस्थित लोगों को झकझोर कर रख दिया था। मंगलवार को जब एक-एक कर पांचों शव बाहर निकाले गए, तब घटनास्थल पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। कई परिजन अपने बच्चों के नाम पुकारते हुए बेसुध हो गए।
सोशल मीडिया पर इन पांचों युवकों का एक फोटो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें सभी युवक मुस्कुराते हुए दिखाई दे रहे हैं। कुछ घंटे पहले तक हंसते-खेलते नजर आने वाले इन युवकों की मौत की खबर ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। यह तस्वीर अब हजारों लोगों की आंखें नम कर रही है।
इस दुखद घटना के बाद कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। जिस स्थान के आसपास यह हादसा हुआ, वहां स्थित जल टंकी परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में उस समय कोई कर्मचारी मौजूद था या नहीं? यदि कर्मचारी मौजूद थे तो क्या उन्होंने युवकों को नदी की ओर जाते नहीं देखा? यदि युवक नदी में नहाने गए थे तो किसी का ध्यान उनकी ओर क्यों नहीं गया? क्या वहां पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी? ऐसे अनेक प्रश्न नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। समाचार लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी थी।
घुग्घुस शहर में इस हादसे के बाद गहरा मातम पसरा हुआ है। पांच परिवारों के आंगन एक साथ सूने हो गए हैं। जिन घरों में कल तक बच्चों की हंसी गूंजती थी, वहां आज चीख-पुकार और मातम का माहौल है। पूरे क्षेत्र में लोग दिवंगत युवकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। वर्धा नदी की यह दर्दनाक घटना लंबे समय तक लोगों के दिलों में एक गहरे जख्म के रूप में याद रखी जाएगी।




