चंद्रपुर : किसानों को खेत तक आने-जाने में सुविधा, कृषि उपज की तेज और कम लागत में ढुलाई तथा कृषि यंत्रों को सीधे खेत तक पहुंचाने के उद्देश्य से चंद्रपुर जिले में विभिन्न योजनाओं के तहत बड़े पैमाने पर खेत मार्ग (पाणंद सड़क) विकसित किए गए हैं। जिला प्रशासन के अनुसार अब तक 6,020 पाणंद सड़कें पूरी हो चुकी हैं, जबकि 1,367 सड़कें निर्माणाधीन हैं।
जिलाधिकारी कार्यालय और जिला परिषद के माध्यम से प्रारंभ में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत 6,351 पाणंद सड़क कार्य शुरू किए गए थे। इनमें से 5,276 सड़कें पूरी हो चुकी हैं और किसान इनका लाभ उठा रहे हैं।
वहीं, नियोजन विभाग की मातोश्री पाणंद सड़क योजना के अंतर्गत जिले में 323 कार्य स्वीकृत किए गए, जिनमें से 237 पूरे हो चुके हैं। जिला खनिज निधि, जिला विकास योजना और मनरेगा के अभिसरण से संचालित पालकमंत्री बळीराजा पाणंद सड़क योजना के तहत 195 कार्य शुरू हुए, जिनमें से 133 पूरे हो चुके हैं। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा मनरेगा के अतिरिक्त कुशल घटक के तहत 512 सड़क कार्य स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 374 पूरे हो चुके हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में आंतरिक संपर्क व्यवस्था मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से 14 दिसंबर 2025 को राजस्व विभाग द्वारा महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री शेतकरी बळीराजा पाणंद सड़क योजना’ शुरू की गई। इस योजना के तहत विधानसभा स्तर पर समिति गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता संबंधित विधायक करते हैं तथा उपविभागीय अधिकारी सदस्य सचिव होते हैं। विभिन्न विभागों के समन्वय से पाणंद सड़कों का नियोजन किया जाता है। वर्तमान में इस योजना के तहत चंद्रपुर जिले में 257 नई सड़कों की रूपरेखा तैयार की गई है।
विधानसभा क्षेत्रवार स्थिति इस प्रकार है:
राजुरा: 661 सड़कें पूर्ण, 244 निर्माणाधीन।
चंद्रपुर: 114 पूर्ण, 30 निर्माणाधीन।
बल्लारपुर: 1,062 पूर्ण, 288 निर्माणाधीन।
ब्रह्मपुरी: 1,373 पूर्ण, 343 निर्माणाधीन।
चिमूर: 2,182 पूर्ण, 412 निर्माणाधीन।
वरोरा: 228 पूर्ण, 41 निर्माणाधीन।
किसानों को मिला सीधा लाभ
ब्रह्मपुरी तहसील के झिलबोडी गांव के किसान राजेश नागतोडे ने बताया कि मातोश्री पाणंद सड़क योजना के तहत उनके गांव में खेत मार्ग बनने से पहले खेत तक पहुंचना बेहद कठिन था और मेड़ों के रास्ते जाना पड़ता था। अब सड़क बनने के बाद खाद, बीज और कृषि मशीनरी सीधे खेत तक पहुंचाई जा सकती है, जिससे समय, श्रम और परिवहन लागत में काफी कमी आई है।




