प्रणयकुमार बंडी
चंद्रपुर: महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के ब्रह्मपुरी तहसील के खेडमक्ता गांव में जमीन की खुदाई के दौरान मिली भगवान श्रीकृष्ण की प्राचीन प्रतिमा इन दिनों इतिहास और धर्मप्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। काले पत्थर से निर्मित यह सुंदर प्रतिमा अपनी बारीक नक्काशी, आभूषणों और कलात्मक शिल्पकारी के कारण विशेष रूप से लोगों का ध्यान खींच रही है।

सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में खेडमक्ता निवासी गजानन मानकर के घर के निर्माण के लिए जमीन में खुदाई का काम चल रहा था। करीब सात फीट गहराई तक गड्ढा खोदने के बाद जमीन के भीतर काले पत्थर का एक हिस्सा दिखाई दिया। जब उसे बाहर निकाला गया तो वहां मौजूद लोगों को सुखद आश्चर्य हुआ। यह कोई साधारण पत्थर नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की बेहद सुंदर प्राचीन प्रतिमा थी।
बताया जाता है कि प्रतिमा में बांसुरी बजाते हुए भगवान श्रीकृष्ण का मनमोहक स्वरूप दिखाई देता है। प्रतिमा पर की गई बारीक नक्काशी, अलंकरण और शिल्पकला तत्कालीन कला की उत्कृष्टता को दर्शाती है।
इतिहास अभ्यासक अशोक सिंह ठाकुर के अनुसार, यह प्रतिमा 12वीं शताब्दी की तथा चालुक्यकालीन मानी जाती है। हालांकि, प्रतिमा की सही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और पुरातात्विक महत्व को लेकर विशेषज्ञ स्तर पर विस्तृत अध्ययन किए जाने पर इससे जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं।
सैकड़ों वर्षों तक जमीन में छिपा रहा धार्मिक-ऐतिहासिक धरोहर
सबसे खास बात यह है कि भगवान श्रीकृष्ण की यह प्रतिमा सैकड़ों वर्षों तक जमीन के भीतर दबी रही और वर्ष 2023 में अचानक सामने आई। चंद्रपुर क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण की इतनी प्राचीन प्रतिमा मिलने की यह पहली दर्ज जानकारी होने की बात कही जा रही है।
प्रतिमा के सामने आने से खेडमक्ता गांव के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को भी नई पहचान मिली है। स्थानीय लोगों के लिए यह केवल एक पुरानी मूर्ति नहीं, बल्कि उनके क्षेत्र की प्राचीन संस्कृति, आस्था और कला की जीवंत विरासत बन गई है।
जमीन के गर्भ में सदियों तक सुरक्षित रही भगवान श्रीकृष्ण की यह प्रतिमा आज खेडमक्ता के इतिहास का अनमोल अध्याय बन चुकी है। धार्मिक आस्था और प्राचीन भारतीय शिल्पकला का यह अनोखा संगम इतिहासप्रेमियों के लिए निश्चित रूप से शोध और आकर्षण का विषय है।
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