Bhante Ratnamani Thero to Begin Indefinite Hunger Strike
निजी Company को दी गई NOC रद्द करने की मांग, प्रशासन की चुप्पी पर समिति ने उठाए सख्त कदम;
शांतीनगर बुद्ध विहार की NOC पर बवाल, 7 सितंबर से आमरण अनशन; बोधी वृक्ष और धम्मध्वज की सुरक्षा को लेकर आर-पार की लड़ाई
प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : शांतीनगर स्थित बोधिसत्व बुद्ध विहार एवं ध्यान साधना केंद्र, परिसर के पवित्र बोधी वृक्ष और धम्मध्वज के संरक्षण को लेकर अब मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थल के संरक्षण की मांग को लेकर 7 सितंबर 2026 से आमरण अनशन शुरू करने का ऐलान किया गया है। आंदोलन की अगुवाई बोधिसत्व बुद्ध विहार एवं ध्यान साधना केंद्र समिति के अध्यक्ष भंते रत्नमनी थेरो करेंगे।
समिति का सबसे बड़ा सवाल निजी Company को शांतीनगर बौद्ध विहार से संबंधित दी गई NOC को लेकर है। समिति ने इस NOC को तत्काल रद्द करने की मांग की है। साथ ही विहार, पवित्र बोधी वृक्ष और धम्मध्वज के अस्तित्व एवं धार्मिक वातावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग प्रशासन के सामने रखी है।

सिर्फ इमारत नहीं, आस्था और धम्म का केंद्र
समिति का कहना है कि बौद्ध विहार महज एक भवन नहीं है। यह बौद्ध समाज के लिए श्रद्धा, धम्म आचरण, ध्यान साधना और सामाजिक एकता का केंद्र है। विहार परिसर का बोधी वृक्ष धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जबकि धम्मध्वज भगवान बुद्ध के धम्म का प्रतीक है। ऐसे में इन तीनों के संरक्षण को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही या अस्पष्टता को समिति स्वीकार करने के मूड में नहीं है।
बार-बार निवेदन के बाद भी समाधान नहीं, अब आमरण अनशन
समिति के अनुसार इस मामले को लेकर प्रशासन, नगर परिषद और संबंधित अधिकारियों को कई बार निवेदन दिए गए तथा बैठकों के माध्यम से लगातार पाठपुरावा किया गया। इसके बावजूद अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है।
समिति का आरोप है कि लगातार प्रयासों के बावजूद जब मामला लंबित रहा, तो लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया गया। इसी के तहत 7 सितंबर से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।
आंदोलनकारियों ने प्रशासन के सामने आठ प्रमुख मांगें रखी हैं— 1. शांतीनगर बौद्ध विहार से संबंधित निजी Company को दी गई NOC तत्काल रद्द की जाए। 2. बोधिसत्व बुद्ध विहार एवं ध्यान साधना केंद्र का संरक्षण किया जाए। 3. विहार परिसर के पवित्र बोधी वृक्ष की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। 4. परिसर में स्थित धम्मध्वज/बौद्ध ध्वज का संरक्षण किया जाए। 5. विहार परिसर का धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण किसी भी कीमत पर प्रभावित न हो। 6. विहार, बोधी वृक्ष और धम्मध्वज के अस्तित्व पर किसी प्रकार का खतरा उत्पन्न न हो, इसकी प्रशासन गारंटी दे। 7. पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कानूनी एवं उचित निर्णय लिया जाए। 8. बौद्ध समाज की धार्मिक भावनाओं और संविधान प्रदत्त अधिकारों का सम्मान किया जाए।
प्रशासन के सामने अब बड़ी चुनौती
7 सितंबर से प्रस्तावित आमरण अनशन के कारण प्रशासन के सामने अब इस विवाद को लेकर तत्काल हस्तक्षेप करने की चुनौती खड़ी हो गई है। समिति ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से किया जाएगा।
समिति की ओर से भंते रत्नमनी थेरो के साथ कार्याध्यक्ष सुमेध पाटील, उपाध्यक्ष भंते संघरक्षीत थेरो, भंते अम्मतम, भंते शिलरक्षीत, भारती निमसटकर, कोषाध्यक्ष प्रज्योत गोरघाटे, सचिव भिमेंद्र कांबळे, सहकोषाध्यक्ष ममता निमसटकर, सहसचिव सविता मडपे/माला मेश्राम सहित पदाधिकारी एवं सदस्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
बौद्ध समाज से लेकर नागरिकों तक समर्थन की अपील
बोधिसत्व बुद्ध विहार एवं ध्यान साधना केंद्र समिति ने बौद्ध समाज के साथ-साथ घुग्घुस के नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सभी नागरिकों से बड़ी संख्या में उपस्थित होकर आंदोलन को समर्थन देने की अपील की है।
अब निगाहें प्रशासन पर हैं—क्या 7 सितंबर से पहले NOC को लेकर कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा, या फिर शांतीनगर में आमरण अनशन के रूप में आंदोलन की शुरुआत होगी? यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।




