कोयला मजदूरों में खुशी का माहौल पिछले सात साल से कोर्ट में नेशनल माइंस फेडरेशन के महासचिव एस.क्यू, जामा की लड़ाई चल रही थी.
घुग्घुस : कोल इंडिया के तहत कोयला श्रमिकों के प्रति वफादार और आज तक नंबर एक, इंटक संघटना (INTC) वरिष्ठ स्तर पर नेतृत्व की लड़ाई में आपस में ही कटघरे में खड़ा था. जिसके चलते इंटक संस्था पिछले छह सात सालों से हर स्तर पर कोल इंडिया की कमेटियों से बाहर थी. जिसके कारण वेतन मंडल में मजदूरों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था. महासंघ के महासचिव एस.क्यू, जामा कोयला मजदूरों को न्याय दिलाने के लिए लगातार कोर्ट में संघर्ष कर रहे थे.
तब कलकत्ता हाई कोर्ट ने दो बेंचों के साथ इंटक के पक्ष में फैसला सुनाया और आदेश दिया कि कोल इंडिया जेबीसीसीआई की अगली कमेटी में इंटक संगठन के चार फुल वेल चार वैकल्पिक सदस्य होंगे. उसके अनुसार, एस.क्यू, जामा ने एक प्रति और पत्र कोल इंडिया को दिया और कहा कि जेबीसीसीआई में इंटक संगठन का प्रतिनिधित्व किया जाए. उसके बाद इंटक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दायर की थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को रद्द कर दिया और 11 वीं JBCC की बैठक विधायक कुमार मंगलम (अनूप कुमार) और इंटक संघ के महासचिव एस.क्यू, जामा के नेतृत्व में होगी. इंटक के पदाधिकारियों व कल्याण अधिकारियों से कहा कि राष्ट्रीय खदान मजदूर महासंघ जब तक मजदूरों को न्याय नहीं दिलाएगा तब तक चुप नहीं बैठेंगे.
इंटक संघ के महासचिव एस.क्यू, जामा को वणी क्षेत्र अध्यक्ष लक्ष्मण राव सादलवार, महामंत्री रामपाल वर्मा, श्रीकांत माहुलकर, जुबेर अहमद, सुनील जाणवे, सदय्या कळवेणी, एम बी देशमाने ब्रिजेश सिह, दी बी कापसे, विजय कुमार, मधुकर झोडे, विश्वकर्माजी, दिलीप किन्हीकर, अब्रारार अहमद, नाना बुरबुरे, रामस्वामी सोदारी ने सम्मानित किय.




