जनता पूछ रही—घोषणापत्र का 28वां वादा आखिर कहां पहुंचा
प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस/चंद्रपुर: चुनाव के दौरान किए गए वादों की असली परीक्षा सत्ता में आने के बाद होती है। घुग्घुस नगर परिषद चुनाव 2025 के दौरान जारी किए गए घोषणापत्र में कुल 37 आकर्षक वादे किए गए थे। इनमें 28वें बिंदु पर सरकारी स्कूलों में पंखे, कंप्यूटर, शुद्ध पेयजल, व्यवस्थित शौचालय और प्रसाधन गृह की व्यवस्था करने का वादा प्रमुखता से किया गया था। चुनाव बीते लगभग छह महीने हो चुके हैं, लेकिन आम नागरिकों के बीच अब यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि इस वादे पर अब तक कितना काम हुआ है।
औद्योगिक शहर होने के बावजूद घुग्घुस में रोजगार का संकट लगातार बना हुआ है। अधिकांश लोग ठेकेदारी व्यवस्था पर निर्भर हैं, खेती लगभग समाप्ति की कगार पर है, महंगाई लगातार बढ़ रही है और बड़ी संख्या में परिवार बैंक, निजी वित्तीय संस्थाओं तथा साहूकारों के कर्ज के बोझ तले दबे हैं। ऐसे हालात में निजी स्कूलों की बढ़ती फीस ने अभिभावकों की चिंता और बढ़ा दी है। लोगों का मानना है कि यदि सरकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों, तो मध्यम और गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चुनाव के समय किए गए वादों को अब धरातल पर उतरना चाहिए। नगर परिषद क्षेत्र की विकास योजनाओं, टाउन प्लानिंग और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर अब जनता जवाब चाहती है। हालांकि अब तक इस संबंध में कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है कि घोषणापत्र के इस महत्वपूर्ण वादे पर कितना कार्य हुआ है।
वहीं नगर परिषद प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का आरोप है कि मुख्याधिकारी, नगराध्यक्ष, सभापति तथा संबंधित अधिकारी योजनाओं की प्रभावी क्रियान्वयन के बजाय केवल कार्यालयी प्रक्रियाओं तक सीमित नजर आ रहे हैं। विकास की योजनाएं कागजों में दिखाई देती हैं, जबकि जमीनी स्तर पर अपेक्षित बदलाव नहीं दिख रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी घोषणापत्र केवल वोट मांगने का दस्तावेज नहीं होता, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही का संकल्प भी होता है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसे वादों की प्रगति पर जनता की नजर स्वाभाविक है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी स्कूलों में पंखे, कंप्यूटर, शुद्ध पेयजल, शौचालय और प्रसाधन गृह जैसी सुविधाएं कब तक उपलब्ध होंगी? क्या फंड की कमी और योजना निर्माण की धीमी गति विकास में बाधा बन रही है, या फिर यह केवल प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है?
फिलहाल इन सवालों के जवाब आने वाला समय देगा। जनता अब वादों से अधिक परिणाम देखना चाहती है। घुग्घुस की जनता की नजर सत्ता पक्ष और नगर परिषद प्रशासन की कार्यशैली पर टिकी है। यह तय अब जनता करेगी कि चुनावी वादे विकास में बदले या केवल राजनीतिक घोषणाएं बनकर रह गए।




