प्रणयकुमार बंडी
घुग्घूस, चंद्रपुर : घुग्घूस शहर के शांतिनगर परिसर में पिछले करीब 30 से 32वर्षों से लंबित विकास कार्यों को लेकर अब उम्मीद की नई किरण दिखाई दे रही है। लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड तथा शांतिनगर के नागरिकों के बीच हुई बैठक के बाद कंपनी ने सड़क, भूमिगत नाली, पथदिवे, शुद्ध पेयजल, बच्चों के लिए खेल मैदान और सार्वजनिक शौचालय सहित विभिन्न विकास कार्यों को लेकर सकारात्मक भूमिका अपनाई है। कंपनी की ओर से 11 अगस्त 2026 को लिखित रूप में अपना पक्ष भी दिया गया है।
1996 में पुराने शांतिनगर से हुआ था विस्थापन
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, लॉयड्स मेटल कंपनी की स्थापना के समय वर्तमान कंपनी परिसर के क्षेत्र में शांतिनगर की पुरानी बस्ती मौजूद थी। वर्ष 1996 में कंपनी के अधिकारी माथुर की पहल से बस्ती के नागरिकों को वर्तमान शांतिनगर क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया। इसके बाद करीब तीन दशक बीत गए, लेकिन बस्ती के विकास की समस्या जस की तस बनी रही।
विकास कार्यों की मांग को लेकर नागरिकों ने कई बार आंदोलन किए और शासन तथा कंपनी का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। कांग्रेस पार्टी की चंद्रपुर जिला महिला उपाध्यक्ष यास्मिन सय्यद सहित स्थानीय नागरिकों ने भी इस मुद्दे को लगातार उठाया।
राजू रेड्डी की मध्यस्थता से बनी सहमति
शांतिनगर की समस्याओं को लेकर कांग्रेस के शहराध्यक्ष एवं घुग्घूस नगरपरिषद उपाध्यक्ष राजू रेड्डी ने कंपनी प्रबंधन और नागरिकों के बीच मध्यस्थता की। चर्चा के बाद कंपनी ने शांतिनगर के विकास को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया।
कंपनी के लिखित पत्र के अनुसार, मौजूदा सीमेंट-कंक्रीट सड़कों की आवश्यकतानुसार मरम्मत, नए रास्तों का निर्माण, भूमिगत ड्रेनेज व्यवस्था, पथदिवे, RO वॉटर यूनिट, बच्चों के लिए खेल मैदान तथा सार्वजनिक शौचालय जैसी सुविधाओं पर काम करने की सहमति जताई गई है।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि विकास कार्य उपलब्ध जमीन, तकनीकी व्यवहार्यता, आवश्यक मंजूरियों तथा अन्य संबंधित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से किए जाएंगे।
रास्ते को लेकर भी था विवाद
शांतिनगर की ओर जाने वाले पुराने मुख्य मार्ग को लेकर भी विवाद सामने आया। कंपनी की ओर से भविष्य के विकास कार्यों के लिए कुछ जमीन आरक्षित रखे जाने के कारण मुख्य रास्ता बंद कर नागरिकों के लिए बगल से वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराया गया था।
स्थानीय स्तर पर कुछ नागरिकों ने इस वैकल्पिक मार्ग का विरोध किया। वहीं, अधिकांश नागरिकों ने विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए रास्ते के मुद्दे का समाधान निकालने की मांग की। इसके बाद यास्मिन सय्यद और राजू रेड्डी की मध्यस्थता से कंपनी अधिकारियों और नागरिकों के बीच चर्चा हुई और विकास कार्यों का रास्ता साफ करने की दिशा में सहमति बनी।
52 प्लॉटधारकों का सवाल, अब कौन होगा जमीन का हकदार?
शांतिनगर के विकास कार्यों के साथ ही जमीन के पट्टों का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण बनकर सामने आया है।
स्थानीय जानकारी के अनुसार, करीब 30-32 वर्ष पहले पुराने शांतिनगर के 52 लोगों को कंपनी की ओर से नए शांतिनगर में प्लॉट दिए गए थे। हालांकि, इन प्लॉटधारकों में से किसी को भी अब तक अधिकृत जमीन पट्टा प्राप्त नहीं हुआ है।
वर्तमान में लगभग 22 लोग जमीन के पट्टे के हकदार के रूप में सामने आ रहे हैं, जबकि करीब 25 लोग कांग्रेस के राजू रेड्डी के संपर्क में आए हैं। समय के साथ कुछ लोग निजी कारणों से क्षेत्र छोड़ चुके हैं, कुछ की मृत्यु हो चुकी है, जबकि कुछ लोग अपने प्लॉट बेचकर अन्यत्र चले गए हैं।
ऐसे में मूल 52 प्लॉटधारकों में से वर्तमान में कौन पात्र है, जिन लोगों का निधन हो चुका है उनके वारिसों का क्या होगा, प्लॉट बेचकर जा चुके लोगों के मामलों का क्या निराकरण होगा और वर्तमान में वहां रहने वाले परिवारों को जमीन का अधिकार किस आधार पर मिलेगा—यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।
विकास की शुरुआत, लेकिन असली परीक्षा जमीन के अधिकार की
शांतिनगर के लिए सड़क, नाली, पानी, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं का रास्ता खुलना निश्चित रूप से नागरिकों के लिए राहत की खबर है। लेकिन तीन दशक से अधिक समय से लंबित जमीन के स्वामित्व और पट्टे का मुद्दा इससे भी बड़ा है।
कंपनी ने अपने पत्र में टाउनशिप से संबंधित जमीन के मालिकाना हक के विषय में नागरिकों के हित को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक विचार और आवश्यक कार्रवाई का उल्लेख किया है। अब देखना होगा कि इस सकारात्मक भूमिका का वास्तविक लाभ शांतिनगर के पात्र परिवारों तक कब और किस रूप में पहुंचता है।
प्रेस मीट में ये रहे उपस्थित
इस अवसर पर घुग्घूस नगरपरिषद उपाध्यक्ष राजू रेड्डी, कांग्रेस पार्टी चंद्रपुर जिला महिला उपाध्यक्ष यास्मिन सय्यद, नगरसेविका पल्लवी घुले, नगरसेविका सुनीता पेंदोर, नगरसेविका आशा पानघाटे, नगरसेवक दिलीप पिट्टलवार, अनवर सय्यद, कलीम शेख एवं अन्य उपस्थित थे।
अब शांतिनगर के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है—विकास कार्यों की शुरुआत के बाद क्या 30 साल पुराना जमीन पट्टे का विवाद भी पूरी तरह सुलझेगा?




