27 से 30 बैनर-कटआउट हटाए गए, लेकिन कुछ राजनीतिक बैनरों को लेकर नागरिकों ने पूछे सवाल; कर व अनुमति की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग
प्रणयकुमार बंडी
घुग्घूस, चंद्रपुर : घुग्घूस नगर परिषद कार्यालय की ओर से सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति लगाए गए बैनर और कटआउट हटाने की कार्रवाई सोमवार को देखने को मिली। नगर परिषद के अधिकारी एवं कर्मचारियों ने विभिन्न स्थानों से लगभग 27 से 30 बैनर और कटआउट हटाए। सार्वजनिक स्थानों को अनधिकृत विज्ञापनों से मुक्त रखने की दृष्टि से इस कार्रवाई को नागरिकों के एक वर्ग ने सराहनीय कदम माना।

हालांकि, कार्रवाई के दौरान कुछ राजनीतिक पदाधिकारियों से संबंधित बैनरों को नहीं हटाए जाने को लेकर अब निष्पक्षता और समान कार्रवाई से जुड़े सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि नियम सभी के लिए समान हैं, तो कार्रवाई भी सभी पर समान रूप से दिखाई देनी चाहिए।
कार्रवाई पर नहीं, समानता पर सवाल
नागरिकों का मूल सवाल यह है कि यदि किसी सार्वजनिक स्थान पर बैनर लगाने के लिए नगर परिषद की पूर्व अनुमति और निर्धारित कर/शुल्क आवश्यक है, तो प्रत्येक बैनर की स्थिति एक समान मानदंड से जांची जानी चाहिए।
विशेष रूप से पोल्हा और तान्हा पोला के दौरान लगाए गए बैनरों को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनके लिए नगर परिषद से विधिवत अनुमति ली गई थी? क्या निर्धारित विज्ञापन शुल्क अथवा कर जमा किया गया था? यदि अनुमति ली गई थी तो उसकी अवधि क्या थी और क्या वह कार्रवाई के दिन भी वैध थी?
इन सवालों का उत्तर नगर परिषद के संबंधित विभाग द्वारा रिकॉर्ड के आधार पर दिया जाना आवश्यक है।

सभापति और नगर सेविका से जुड़े बैनरों पर चर्चा
कार्रवाई के दौरान नगर परिषद के एक सभापति तथा एक नगर सेविका से संबंधित बैनर/कटआउट नहीं हटाए जाने को लेकर नागरिकों में चर्चा तेज हुई है। इसे लेकर किसी व्यक्ति विशेष पर नियम उल्लंघन का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन नगर प्रशासन के सामने एक महत्वपूर्ण प्रश्न अवश्य है—
यदि अन्य बैनरों की अनुमति और कर भुगतान की जांच के बाद उन्हें हटाया गया, तो इन बैनरों की अनुमति और कर भुगतान की स्थिति क्या थी?
यदि संबंधित बैनरों के पास वैध अनुमति थी, तो नगर परिषद को यह जानकारी सार्वजनिक कर नागरिकों की शंकाओं का समाधान करना चाहिए। और यदि अनुमति नहीं थी, तो समान नियमों के तहत कार्रवाई क्यों नहीं हुई—यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।

क्या नियम महापुरुषों और राजनीतिक व्यक्तियों के लिए अलग-अलग हैं?
नागरिकों की चर्चा में यह सवाल भी सामने आ रहा है कि सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए बैनरों के संबंध में नगर परिषद का नियम व्यक्ति, पद, राजनीतिक दल या सामाजिक प्रभाव देखकर बदलता है या सभी पर समान रूप से लागू होता है?
महापुरुषों की जयंती, धार्मिक-सामाजिक कार्यक्रम अथवा राजनीतिक गतिविधि—किसी भी अवसर पर लगाए जाने वाले बैनरों के लिए यदि नगर परिषद की अनुमति आवश्यक है, तो उसकी प्रक्रिया स्पष्ट और समान होनी चाहिए।
कानून की नजर में व्यक्ति का पद नहीं, नियमों का पालन महत्वपूर्ण होना चाहिए।

कर विभाग की भूमिका भी जांच के दायरे में
इस पूरे मामले में नगर परिषद के कर/विज्ञापन विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि किसी बैनर के लिए निर्धारित कर या शुल्क लिया गया है, तो उसका रसीद क्रमांक, अनुमति आदेश, अवधि और स्थान जैसे रिकॉर्ड नगर परिषद के पास उपलब्ध होने चाहिए।
इसलिए नागरिकों की मांग है कि नगर परिषद प्रशासन यह स्पष्ट करे—
- संबंधित बैनरों के लिए अनुमति ली गई थी या नहीं?
- यदि अनुमति थी तो किस अधिकारी ने दी?
- निर्धारित कर/शुल्क जमा किया गया था या नहीं?
- अनुमति की वैधता कितने दिनों की थी?
- क्या अनुमति की अवधि समाप्त होने के बाद भी बैनर लगे रहे?
- सभी बैनरों पर एक समान कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दी?
- हटाए गए और नहीं हटाए गए बैनरों की सूची सार्वजनिक क्यों न की जाए?
राजनीतिक दलों की भी बढ़ेगी जिम्मेदारी
घुग्घूस नगर परिषद में कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस, भाजपा तथा निर्दलीय पृष्ठभूमि से निर्वाचित नगर सेवक-नगर सेविकाएं, नगराध्यक्ष तथा स्वीकृत नगर सेवक मौजूद हैं। ऐसे में यह विषय केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित न रहकर नगर परिषद की पारदर्शिता और जवाबदेही से भी जुड़ गया है।
अब देखना होगा कि विभिन्न राजनीतिक दलों से निर्वाचित जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर नियमों की समानता और पारदर्शिता के पक्ष में क्या भूमिका निभाते हैं।
मुख्याधिकारी के निर्णय पर नजर
पूरे मामले में अब मुख्याधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि नागरिकों द्वारा उठाए गए सवालों की शिकायत औपचारिक रूप से सामने आती है, तो प्रशासन संबंधित बैनरों के अनुमति-पत्र और कर भुगतान रिकॉर्ड की जांच कर सकता है।
यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई और यदि अनुमति वैध पाई जाती है तो उसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करना—दोनों ही स्थितियों में रिकॉर्ड आधारित पारदर्शिता नागरिकों के सवालों का समाधान कर सकती है।

मुद्दा किसी व्यक्ति का नहीं, समान नियमों का है
बैनर हटाने की कार्रवाई का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर अवैध विज्ञापन और अनधिकृत होर्डिंग पर नियंत्रण रखना है। इसलिए कार्रवाई का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि क्या नियम समान रूप से लागू हुए या नहीं।
नागरिकों के लिए असली सवाल यह नहीं होना चाहिए कि बैनर किसका था, बल्कि यह होना चाहिए कि क्या उसके पास वैध अनुमति थी और निर्धारित कर/शुल्क जमा किया गया था?
नगर परिषद यदि हटाए गए तथा शेष बैनरों की अनुमति और कर स्थिति स्पष्ट कर देती है, तो कई सवालों का जवाब स्वयं मिल जाएगा।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि घुग्घूस नगर परिषद प्रशासन और मुख्याधिकारी इन उठते सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और क्या सभी बैनरों पर समान नियम लागू किए जाते हैं।




