Tuesday, September 22, 2026

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इंफाल में महिलाओं का मशाल जुलूस, 1951 को आधार वर्ष मानकर NRC अपडेट करने की मांग तेज

इंफाल/मणिपुर : मणिपुर की राजधानी इंफाल में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को अपडेट करने की मांग को लेकर महिलाओं ने बड़े पैमाने पर मशाल जुलूस निकाला। मीरा पैबी यानी महिला कार्यकर्ताओं ने हाथों में जलती मशालें लेकर सड़कों पर मार्च किया और मांग उठाई कि राज्य में जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने से पहले NRC को अपडेट किया जाए तथा इसके लिए 1951 को आधार वर्ष बनाया जाए।

मशाल जुलूस का आयोजन Campaign for Justice and Fair Delimitation (JFD) के बैनर तले किया गया। अगस्त में हुए ऐसे ही एक बड़े जुलूस में नॉर्थ इंफाल मीरा एंड क्लब्स कोऑर्डिनेटिंग कमेटी के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाओं ने हिस्सा लिया था। जुलूस कोइरेंगेई गांव से शुरू होकर राष्ट्रीय राजमार्ग-2 के रास्ते लुवांगसांगबाम गांव स्थित लिबरल कॉलेज की ओर बढ़ा। संवेदनशील स्थिति को देखते हुए पुलिस की भारी तैनाती भी की गई थी।

‘NRC अपडेट के बाद ही जनगणना’ की मांग

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मणिपुर में NRC का अपडेट जनगणना से पहले किया जाना चाहिए। आंदोलन से जुड़े संगठनों की ओर से “No NRC, No Census” जैसे नारे भी लगाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में NRC के लिए 1951 को आधार वर्ष निर्धारित करना और जनगणना प्रक्रिया को NRC अपडेट के बाद आगे बढ़ाना शामिल है।

यह मुद्दा अब लगातार जारी आंदोलन का हिस्सा बन गया है। सितंबर में भी इंफाल और राज्य के अन्य हिस्सों में महिलाओं, छात्र संगठनों और नागरिक समाज समूहों की ओर से धरने तथा विरोध प्रदर्शन किए गए। 19 सितंबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, मीरा पैबी समूहों तथा करीब 20 गांवों के प्रतिनिधियों ने भी NRC को 1951 आधार वर्ष के साथ अपडेट करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।

विधानसभा में भी उठा NRC का मुद्दा

मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजाम ने विधानसभा में कहा है कि राज्य सरकार NRC अपडेट के लिए 1951 को आधार वर्ष बनाने का लक्ष्य रखती है। हालांकि, इस प्रक्रिया को राज्य सरकार अकेले लागू नहीं कर सकती और केंद्र सरकार की मंजूरी की आवश्यकता होगी। इस मुद्दे को लेकर ऐतिहासिक दस्तावेजों और पुराने रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

वहीं, 2 सितंबर 2026 को मणिपुर विधानसभा द्वारा NRC को जनगणना से पहले अपडेट करने संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा हुई, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार उस प्रस्ताव में आधार वर्ष के रूप में 1951 का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। इसी वजह से JFD और अन्य संगठनों ने 1951 को स्पष्ट रूप से आधार वर्ष घोषित करने की मांग जारी रखी है।

मुद्दा संवेदनशील, अलग-अलग समुदायों की अलग चिंताएं

मणिपुर में NRC का मुद्दा केवल नागरिकता दस्तावेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की जनसांख्यिकी, स्थानीय पहचान और लंबे समय से चले आ रहे जातीय तनाव से भी जुड़ा हुआ है। NRC के समर्थक संगठनों का कहना है कि इससे अवैध आव्रजन की पहचान करने और स्थानीय आबादी के हितों की रक्षा करने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर, कुकी-जो समुदायों से जुड़े संगठनों ने 1951 आधारित NRC की मांग पर आपत्ति जताई है और इसे लेकर नागरिकता से वंचित किए जाने की आशंका व्यक्त की है।

ऐसे में इंफाल की सड़कों पर महिलाओं का मशाल जुलूस मणिपुर में NRC और जनगणना को लेकर बढ़ती सार्वजनिक सक्रियता को दर्शाता है। प्रदर्शनकारी सरकार से स्पष्ट निर्णय और आधिकारिक आदेश की मांग कर रहे हैं, जबकि NRC की प्रक्रिया, आधार वर्ष और उसके क्रियान्वयन को लेकर केंद्र और राज्य स्तर पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण बनी हुई है।

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Pranaykumar Bandi

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