वेकोली वणी क्षेत्र और घुग्घूस नगर परिषद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
प्रणयकुमार बंडी
घुग्घूस/चंद्रपुर : घुग्घूस के वेकोली वणी क्षेत्र अंतर्गत सुभाष नगर कामगार वसाहत परिसर में नवनिर्मित पानी की टंकी के आसपास बने गहरे गड्ढे अब स्थानीय नागरिकों और विशेष रूप से बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं। परिसर में रहने वाले बच्चों ने इस समस्या की ओर आवाज उठाते हुए सवाल खड़ा किया है कि आखिर किसी निर्माण कार्य के बाद नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी है?
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एक ओर क्षेत्र में पानी की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नई पानी की टंकी का निर्माण किया गया, लेकिन दूसरी ओर उसके आसपास यदि गहरे और खुले गड्ढे रह गए हैं, तो यह व्यवस्था और नियोजन पर सवाल खड़े करता है। विकास कार्य का उद्देश्य नागरिकों को सुविधा देना है या उनके लिए नया खतरा पैदा करना? यह सवाल अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

बच्चों की आवाज को नजरअंदाज करना पड़ेगा भारी?
सुभाष नगर परिसर में बच्चों की आवाज के रूप में सामने आया यह मुद्दा केवल एक वार्ड की छोटी समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। खुले और गहरे गड्ढे किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। खासकर बच्चों के आवागमन वाले क्षेत्र में सुरक्षा उपायों की अनदेखी हुई है तो संबंधित विभागों को तत्काल स्थिति का जायजा लेना चाहिए।
स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि क्या किसी अप्रिय घटना के बाद प्रशासन जागेगा, या घटना से पहले ही सुरक्षा के इंतजाम किए जाएंगे?
जिम्मेदारी किसकी?
घुग्घूस नगर परिषद क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में विभिन्न विभागों की भूमिका और अधिकार अलग-अलग हो सकते हैं। ऐसे में वेकोली क्षेत्र की जमीन, निर्माण कार्य, पानी की टंकी तथा उसके आसपास की सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में वेकोली प्रशासन और घुग्घूस नगर परिषद को अपनी-अपनी जिम्मेदारी स्पष्ट करनी चाहिए।
किस विभाग ने निर्माण कार्य कराया? कार्य की निगरानी किसने की? निर्माण पूर्ण होने के बाद परिसर की सुरक्षा व्यवस्था किसके जिम्मे है? गड्ढों को भरने अथवा बैरिकेडिंग करने की जिम्मेदारी किसकी है? इन सवालों का स्पष्ट जवाब जनता को मिलना जरूरी है।
अधिकारी, जनप्रतिनिधि और प्रशासन के सामने चुनौती
प्रभाग क्रमांक 6 से जुड़े नगर सेवक-नगर सेविका सहित नगर परिषद के संबंधित अधिकारी, मुख्याधिकारी और पदाधिकारियों के सामने भी यह मामला एक सीधा जनहित का सवाल बनकर खड़ा है।
नागरिकों को राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाला समाधान चाहिए। यदि समस्या वास्तव में मौजूद है तो उसका निरीक्षण कर तत्काल सुरक्षा उपाय करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
वायरल वीडियो दबेगा या समस्या सुलझेगी?
स्थानीय स्तर पर इस समस्या से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने की चर्चा के बीच अब एक और सवाल उठ रहा है—क्या सोशल मीडिया पर उठी आवाज को दबाने या नजरअंदाज करने के बजाय प्रशासन उस आवाज के पीछे मौजूद वास्तविक समस्या का समाधान करेगा?
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होना अपने आप में समस्या का समाधान नहीं है। असली परीक्षा तब होगी जब संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचेंगे, स्थिति का निरीक्षण करेंगे और नागरिकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाएंगे।
राजनीति नहीं, समाधान चाहिए
सुभाष नगर की यह समस्या यदि समय रहते हल नहीं की गई, तो यह केवल पानी की टंकी के आसपास के गड्ढों का मामला नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी और सार्वजनिक निर्माण कार्यों के बाद सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी पर बड़ा सवाल बन सकता है।
फिलहाल संबंधित वेकोली अधिकारियों, घुग्घूस नगर परिषद प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान सामने नहीं आया है।
अब देखना यह है कि बच्चों की उठाई आवाज प्रशासन के कानों तक पहुंचती है या फिर यह मामला भी आश्वासन, राजनीति और सोशल मीडिया की बहस में उलझकर रह जाता है। नागरिकों की अपेक्षा स्पष्ट है—पहले सुरक्षा, फिर राजनीति।




