प्रणयकुमार बंडी
घुग्घूस, चंद्रपुर : उकणी-बेलसनी क्षेत्र के कोयला परियोजना प्रभावित किसानों ने मौजा उकणी खंड-1 में शेष लगभग 600 एकड़ जमीन का तत्काल अधिग्रहण, किसानों को नौकरी व उचित मुआवजा तथा उकणी गांव का लंबित पुनर्वास जल्द पूरा करने की मांग उठाई है। इसी मांग को लेकर 11 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र विधान परिषद सदस्य एवं पूर्व राज्यमंत्री बच्चू कडू (ओमप्रकाश कडू) को किसानों की ओर से निवेदन सौंपा गया।
निवेदन में किसानों ने बताया कि उकणी क्षेत्र की जमीन का बड़े पैमाने पर अधिग्रहण वर्ष 1990 से विभिन्न चरणों में किया गया। निलजई और उकणी ओपनकास्ट खदानों के लिए अब तक लगभग 3,950 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जा चुकी है। किसानों के अनुसार उकणी गांव के भौगोलिक क्षेत्र में करीब 85 प्रतिशत जमीन अधिग्रहित हो चुकी है, जबकि लगभग 15 प्रतिशत यानी 600 एकड़ जमीन अभी भी शेष है।
किसानों का कहना है कि उकणी गांव का पुनर्वास पिछले करीब 10 वर्षों से लंबित है और अब यह प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई जा रही है। ऐसे में यदि गांव का पुनर्वास पूरा हो जाता है और शेष जमीन का अधिग्रहण नहीं किया गया, तो करीब 175 किसान अपनी पुश्तैनी जमीन पर खेती करने से वंचित हो सकते हैं।
खदान, डंप और बाढ़ से खेती प्रभावित
किसानों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2016 में निलजई ओपनकास्ट खदान के विस्तार के लिए अधिग्रहित जमीन पर बड़े-बड़े मिट्टी के ढेर लगाए गए हैं। इन ढेरों के कारण बारिश का पानी आसपास की खेती में जमा होता है और मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। किसानों के अनुसार इससे कृषि उत्पादन में भारी गिरावट आई है।
एक ओर वर्धा नदी और दूसरी ओर निलजई तथा उकणी ओपनकास्ट खदानों के कारण क्षेत्र चारों तरफ से प्रभावित है। किसानों का दावा है कि हर वर्ष बाढ़ का पानी शेष 600 एकड़ जमीन में घुसने से फसल बर्बाद होती है। ऐसी परिस्थितियों में खेती करना किसानों के लिए लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
वर्षों से जारी है आंदोलन
किसानों के अनुसार शेष जमीन के अधिग्रहण और पुनर्वास की मांग को लेकर ग्राम पंचायत, ग्रामीणों तथा किसानों द्वारा कई बार प्रशासन और वेकोलि प्रबंधन को ज्ञापन दिए गए। इसके बावजूद ठोस निर्णय नहीं होने पर 21 जनवरी 2025 को कोयला खदान परियोजना प्रभावित किसान संघर्ष समिति का गठन किया गया।
समिति ने समय-समय पर आमरण उपोषण, जलसमाधि आंदोलन, चक्काजाम और अन्य आंदोलनों के माध्यम से अपनी मांगें उठाईं। 29 जून 2026 से वेकोलि मुख्यालय, नागपुर के प्रवेशद्वार के सामने श्रृंखलाबद्ध उपोषण भी शुरू किया गया था।
बैठक में 15 दिन में कार्रवाई का आश्वासन
किसानों के अनुसार 1 जुलाई 2026 को प्रतिनिधिमंडल ने हिंद मजदूर सभा के केंद्रीय कार्यालय में शिवकुमार यादव से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। इसके बाद उनके हस्तक्षेप से वेकोलि के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ किसानों की बैठक आयोजित की गई।
बैठक में किसानों ने जमीन अधिग्रहण, पुनर्वास और खदान से होने वाले नुकसान की जानकारी दी। प्रबंधन की ओर से समस्याओं की 15 दिनों के भीतर प्रत्यक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिए जाने का दावा किसानों ने किया। साथ ही उकणी गांव का पुनर्वास जल्द पूरा करने और प्रभावित शेष जमीन के अधिग्रहण की दिशा में कार्रवाई करने की बात कही गई।
हालांकि किसानों का आरोप है कि 15 दिन बीत जाने के बाद भी आश्वासन के अनुरूप कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
बच्चू कडू से सीएमडी से चर्चा कर न्याय दिलाने की मांग
इसी पृष्ठभूमि में किसानों ने 11 अगस्त को बच्चू कडू को निवेदन देकर मामले की गंभीरता को समझते हुए वेकोलि के सीएमडी कार्यालय, नागपुर के अधिकारियों से चर्चा करने और उकणी-बेलसनी के प्रभावित किसानों को न्याय दिलाने की मांग की।
किसानों की प्रमुख मांगों में शेष 600 एकड़ जमीन का बिना शर्त तत्काल अधिग्रहण, भूधारकों को नौकरी एवं उचित मुआवजा, उकणी गांव का लंबित पुनर्वास पूरा करना तथा वर्ष 2016 से शेष जमीन धारकों को प्रति हेक्टेयर 5 लाख रुपये वार्षिक नुकसानभरपाई देना शामिल है।
किसानों का कहना है कि जमीन, पुनर्वास और खेती से जुड़े इस संकट का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो प्रभावित परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट खड़ा हो सकता है। अब किसानों की नजर इस बात पर है कि बच्चू कडू के हस्तक्षेप के बाद वेकोलि प्रबंधन इस मामले में क्या निर्णय लेता है।




