महीनों से बंद पड़ी व्यवस्था पर नगर परिषद प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में; बार-बार शिकायतों के बावजूद मरम्मत नहीं होने का आरोप
प्रणयकुमार बंडी
घुग्घूस/चंद्रपुर : घुग्घूस नगर परिषद के प्रभाग क्रमांक 1 अंतर्गत शिवनगर परिसर में नागरिकों को पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित सोलर वाटर बोरवेल और सोलर पानी टंकी लंबे समय से उपयोग से बाहर होने के कारण अब महज शो-पीस बनकर रह गई है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, बीते कई महीनों से पानी की इस व्यवस्था में तकनीकी खराबी बनी हुई है, लेकिन बार-बार दुरुस्ती की मांग किए जाने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनता के पैसों से लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई जलापूर्ति व्यवस्था यदि महीनों तक बंद रहती है, तो उसके रखरखाव और जवाबदेही की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? नगर परिषद प्रशासन, संबंधित अधिकारी, पानी आपूर्ति विभाग के कर्मचारी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर नागरिकों में सवाल उठना स्वाभाविक है।
गर्मी में टैंकर से पानी, अब सोलर बोरवेल की अनदेखी क्यों?
गर्मी के मौसम में शिवनगर परिसर में पानी की समस्या को देखते हुए टैंकर के माध्यम से पानी की आपूर्ति किए जाने की जानकारी सामने आई थी। ऐसे में जब परिसर में पहले से ही सोलर बोरवेल और पानी की टंकी जैसी स्थायी जलापूर्ति व्यवस्था मौजूद है, तब उसे चालू और सुचारु रखने के बजाय महीनों तक बंद अवस्था में छोड़ना नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
यदि टंकी या सोलर बोरवेल में तकनीकी खराबी है तो उसकी मरम्मत में इतना समय क्यों लग रहा है? क्या संबंधित विभाग ने खराबी का तकनीकी निरीक्षण किया है? मरम्मत के लिए अनुमानित खर्च कितना है? और यदि मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया है तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है? इन सवालों का स्पष्ट जवाब नागरिकों को मिलना आवश्यक है।
लाखों रुपये के सरकारी खर्च का रखरखाव कौन करेगा?
किसी भी सार्वजनिक परियोजना का निर्माण केवल उद्घाटन या योजना पूरी करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उसके बाद नियमित रखरखाव, बिजली/सोलर सिस्टम की जांच, मोटर और बोरवेल की देखरेख तथा पानी की टंकी की कार्यशीलता सुनिश्चित करना संबंधित प्रशासन की जिम्मेदारी का हिस्सा है।
यदि सरकारी निधि से तैयार की गई जलापूर्ति योजना कुछ ही समय बाद बंद हो जाए और लंबे समय तक उसकी मरम्मत न हो, तो इससे सार्वजनिक धन के प्रभावी उपयोग और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।
हालांकि, इस मामले में वास्तविक निर्माण लागत, मरम्मत की तकनीकी वजह और अब तक किए गए खर्च की पुष्टि संबंधित नगर परिषद के आधिकारिक अभिलेखों से होना आवश्यक है।
WCL क्षेत्र में CSR से बड़ी पानी टंकी की मांग क्यों नहीं?
शिवनगर परिसर को स्थानीय स्तर पर WCL द्वारा बसाए गए परिसर के रूप में जाना जाता है। ऐसे में नागरिकों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्षेत्र की दीर्घकालीन पेयजल समस्या को देखते हुए CSR के माध्यम से बड़ी और नियमित जलापूर्ति योजना विकसित करने के लिए संबंधित औद्योगिक प्रतिष्ठान के साथ नगर परिषद प्रशासन की ओर से ठोस पहल क्यों नहीं की जा रही है?
यदि CSR के माध्यम से ऐसी योजना संभव है, तो नगर परिषद को संबंधित कंपनी के समक्ष प्रस्ताव रखने, तकनीकी आवश्यकता का आकलन करने और नागरिकों के हित में स्थायी जलापूर्ति व्यवस्था तैयार करने की दिशा में पहल करनी चाहिए। वहीं, CSR के तहत किसी कार्य की पात्रता और स्वीकृति संबंधित नियमों एवं कंपनी के निर्णय पर निर्भर करेगी।
नगर सेवक और नगर सेविका की भूमिका पर भी सवाल
प्रभाग क्रमांक 1 के नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले नगर सेवक और नगर सेविका के लिए यह मुद्दा सीधे जनहित से जुड़ा हुआ है। नागरिकों द्वारा समस्या उठाए जाने के बाद क्या उन्होंने नगर परिषद प्रशासन से लिखित रूप में मरम्मत की मांग की? संबंधित अधिकारियों के साथ स्थल निरीक्षण किया? प्रस्ताव की स्थिति की जानकारी ली? इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।
पानी आपूर्ति सभापति से लेकर नगराध्यक्ष तक जवाबदेही की मांग
जलापूर्ति जैसी मूलभूत सुविधा से जुड़ा मामला केवल किसी एक कर्मचारी या अधिकारी की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं माना जा सकता। संबंधित विभागीय सभापति, मुख्याधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी तथा नगर परिषद के शीर्ष जनप्रतिनिधियों से भी यह अपेक्षा की जाती है कि वे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें।
क्या सोलर बोरवेल और टंकी की तकनीकी जांच कराई गई है? मरम्मत का प्रस्ताव कब तैयार किया गया? मरम्मत के लिए कितनी निधि आवश्यक है? पिछले महीनों में इस व्यवस्था पर कितना खर्च हुआ? और इसे दोबारा कब तक शुरू किया जाएगा? इन सवालों पर नगर परिषद प्रशासन की स्पष्ट जानकारी सामने आना नागरिकों के हित में होगा।
अब सिर्फ आश्वासन नहीं, कार्रवाई की जरूरत
शिवनगर के नागरिकों के लिए पानी कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि मूलभूत नागरिक अधिकार और रोजमर्रा की आवश्यकता है। इसलिए बंद पड़ी जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर केवल आश्वासन या कागजी कार्रवाई के बजाय वास्तविक समाधान की आवश्यकता है।
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि नगर परिषद प्रशासन तत्काल स्थल निरीक्षण कर सोलर बोरवेल और पानी टंकी की तकनीकी जांच कराए, खराबी की वजह सार्वजनिक करे, आवश्यक मरम्मत पूरी कर व्यवस्था को पुनः शुरू करे और भविष्य में नियमित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करे।
अब देखना यह है कि शिवनगर की पानी की समस्या पर नगर परिषद प्रशासन और जनप्रतिनिधि केवल संज्ञान लेने तक सीमित रहते हैं या वास्तव में मैदान में उतरकर नागरिकों को स्थायी समाधान उपलब्ध कराते हैं।




