घुग्घुस में कंपनियों और पत्रकारों को लेकर उठा विवाद – सच्चाई या षड्यंत्र?
(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस, चंद्रपुर : शहर में इन दिनों एक बड़ी चर्चा ने माहौल गरमा दिया है। आरोप है कि घुग्घुस क्षेत्र में कुछ प्रतिनिधि और पत्रकार कंपनियों से अवैध वसूली कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कंपनियों के खिलाफ खबरें प्रकाशित होने से रोकने के लिए भी ये कथित लोग दलाल की भूमिका निभा रहे हैं। इन काली करतूतों की वजह से ईमानदार और शांतिप्रिय पत्रकारों की छवि धूमिल हो रही है।
सूत्रों के अनुसार हाल ही में शांति नगर वसाहत को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी गई थी। इसके बाद कंपनी प्रबंधन ने हरसंभव प्रयास कर आंदोलन को शांत करने की कोशिश की। इस दौरान शहर के मीडिया प्रतिनिधियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई। यहां तक कि पुलिस का सहारा लेकर दबाव बनाने की कोशिश हुई।
पिछले 30-35 वर्षों से शांति नगर की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं, लेकिन हाल ही में जलसमाधि की चेतावनी ने कंपनी प्रबंधन को झकझोर दिया। नतीजतन, कंपनी ने रोड और नाली के काम का भूमिपूजन करने का फैसला लिया। हालांकि, इस लंबे अंतराल में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी इस ओर गंभीर नहीं दिखे।
चर्चाओं में 6 लाख रुपए का मामला
स्थानीय नुक्कड़ चर्चाओं में यह खबर भी चर्चा का विषय है कि कंपनी ने मीडिया प्रतिनिधियों को लगभग 6 लाख रुपए दिए हैं। इसी वजह से आंदोलन और समस्याओं पर गंभीर रिपोर्टिंग नहीं हो रही। यह भी कहा जा रहा है कि यह पूरा मामला पत्रकारों और प्रतिनिधियों को बदनाम करने की साजिश हो सकता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि –
आखिर वो कौन पत्रकार/प्रतिनिधि है जो कंपनियों का करीबी माना जा रहा है? क्या अभी तक चुप रहे मीडिया प्रतिनिधि अब सच उजागर करेंगे? क्या समय रहते ED, CID और इनकम टैक्स विभाग इस पूरे मामले की जांच करेगा?
फिलहाल, घुग्घुस में यह मुद्दा आम नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के बीच गरमागरम चर्चा का विषय बना हुआ है। सच्चाई क्या है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।





