प्रणयकुमार बंडी
घुग्घूस/चंद्रपुर: तेज बारिश ने घुग्घूस नगर परिषद के प्रभाग क्रमांक-11 में विकास कार्यों और नगर प्रशासन की तैयारियों की हकीकत उजागर कर दी है। रविवार (28 जून) दोपहर हुई बारिश के दौरान अंडरग्राउंड नालियां जाम हो गईं, जिससे गंदा पानी सड़कों के साथ-साथ आसपास के घरों में घुस गया। हालात इतने खराब हो गए कि नगर परिषद का कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा और वार्ड के नागरिकों को स्वयं नालियों से कचरा व जाम हटाकर पानी निकासी का रास्ता खोलना पड़ा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून पूर्व नालियों की सफाई का दावा केवल कागजों तक सीमित रहा। जमीनी स्तर पर न तो नालियों की प्रभावी सफाई हुई और न ही टूटे हुए स्लैब व ढक्कनों की मरम्मत की गई। कई स्थानों पर लोहे के ढक्कन चोरी हो चुके हैं, जबकि कुछ लोग सड़क का कचरा सीधे नालियों में डाल रहे हैं, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जनप्रतिनिधि के घर की ओर जाने वाली नाली की ही ऐसी बदहाल स्थिति है, तो वार्ड के अन्य हिस्सों की स्थिति कैसी होगी, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। इससे पहले भी मीडिया ने इस नाली की दुर्दशा को प्रमुखता से उठाया था, लेकिन नगर परिषद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
अब सवाल नगराध्यक्ष, मुख्याधिकारी, इंजीनियर और स्वच्छता विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़े हो रहे हैं। आखिर मानसून से पहले नालियों की सफाई और मरम्मत क्यों नहीं हुई? यदि हुई, तो उसका परिणाम जमीन पर क्यों दिखाई नहीं दे रहा?
इसी के साथ नाली निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी संदेह के घेरे में आ गई है। स्थानीय नागरिक पूछ रहे हैं कि क्या ठेकेदार ने निर्माण में लापरवाही बरती थी? यदि नाली बनते ही टूट गई, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है? ठेकेदार को भुगतान हो चुका है, ऐसे में मरम्मत का खर्च कौन उठाएगा? क्या फिर से जनता के टैक्स का पैसा खर्च होगा या विकास के नाम पर नया टेंडर निकालकर सरकारी धन की बर्बादी की जाएगी?
प्रभाग क्रमांक-11 के निवासी विकास खाड़े ने वीडियो साझा करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के जनप्रतिनिधि वार्ड की मूलभूत समस्याओं के समाधान में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। उनके अनुसार, नाली निर्माण के समय से ही इसकी स्थिति खराब है, लेकिन नगर प्रशासन ने कभी स्थायी समाधान की दिशा में कदम नहीं उठाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते मरम्मत और सफाई नहीं की गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या नगर परिषद और जिम्मेदार अधिकारी इस चेतावनी को गंभीरता से लेकर तत्काल कार्रवाई करेंगे, या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा? फिलहाल प्रभाग क्रमांक-11 के नागरिकों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।




