Sunday, June 7, 2026

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टूटी नालियां, जाम व्यवस्था और सवालों में विकास: प्रभाग 11 की बदहाली पर नगर परिषद और जनप्रतिनिधि कठघरे में

प्रणयकुमार बंडी

घुग्घुस, चंद्रपुर : घुग्घुस नगर परिषद के प्रभाग क्रमांक 11 में अंडरग्राउंड नालियों की बदहाल स्थिति ने नगर प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। मानसून की दस्तक से पहले ही कई स्थानों पर नालियां जाम पड़ी हैं, ढक्कन टूट चुके हैं और कुछ जगहों पर लोहे के ढक्कन चोरी हो जाने से नागरिकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नालियों के ढक्कन टूटने और खुले रहने के कारण कुछ लोग उनमें कचरा फेंक रहे हैं, जिससे जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है। कई स्थानों पर नालियां गंदगी से भर चुकी हैं और बारिश के दौरान जलभराव तथा दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।

सबसे हैरानी की बात यह बताई जा रही है कि जिस मार्ग से प्रभाग के जनप्रतिनिधि के घर की ओर आवागमन होता है, वहां की नाली भी दयनीय अवस्था में है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जनप्रतिनिधियों के आसपास की स्थिति यह है, तो वार्ड के अन्य हिस्सों की हालत कैसी होगी, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

स्थानीय युवक मनमोहन उर्फ वंशी महाकाली ने नालियों की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के जनप्रतिनिधि अपने-अपने वार्डों की मूलभूत समस्याओं के समाधान में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर जनता की सुरक्षा और सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर इतनी उदासीनता क्यों बरती जा रही है।

वहीं स्थानीय निवासी विकास खाड़े का कहना है कि नाली निर्माण के समय से ही इसकी स्थिति संतोषजनक नहीं थी। उनके अनुसार नाली कई जगहों पर टूटी हुई है और लंबे समय से जाम पड़ी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नगर प्रशासन मानसून से पहले इस समस्या का स्थायी समाधान करेगा।

इस पूरे मामले में निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी चर्चा का विषय बन गई है। नागरिकों के बीच यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या नाली निर्माण के दौरान ठेकेदार द्वारा लापरवाही बरती गई थी? यदि निर्माण के कुछ समय बाद ही नाली टूटने लगी और ढक्कन क्षतिग्रस्त हो गए, तो संबंधित कार्यों की तकनीकी जांच क्यों नहीं की गई? और यदि कार्य पूर्ण होने के बाद ठेकेदार को भुगतान किया जा चुका है, तो अब मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी होगी?

नागरिक यह भी पूछ रहे हैं कि यदि क्षति लापरवाह वाहन चालकों के कारण हुई है तो उनकी जवाबदेही तय होगी या फिर एक बार फिर जनता के टैक्स के पैसे से मरम्मत कराई जाएगी। कहीं ऐसा तो नहीं कि विकास कार्यों के नाम पर दोबारा नया टेंडर निकालकर सार्वजनिक धन का अतिरिक्त बोझ जनता पर डाला जाए?

मानसून सिर पर है, लेकिन नालियों की हालत प्रशासनिक दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। अब निगाहें नगर परिषद, संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि वे समय रहते कार्रवाई करते हैं या फिर किसी बड़े हादसे अथवा जलभराव की स्थिति का इंतजार किया जाएगा।

प्रभाग 11 के नागरिकों का कहना है कि उन्हें आश्वासनों की नहीं, बल्कि जवाबदेही और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर दोषियों की जिम्मेदारी तय करता है या फिर यह मुद्दा भी अन्य समस्याओं की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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