प्रणयकुमार बंडी
चंद्रपुर (घुग्घुस) : बुधवार, 18 मार्च 2026 की रात करीब 11 बजे एक ओवरलोड वाहन ने घुग्घुस-वणी मार्ग पर जमकर कहर बरपाया। वाहन चलते-चलते सड़क पर काली डस्ट गिराता रहा, जिससे पूरी सड़क खराब हो गई। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस तरह की लापरवाही और मनमानी अब घुग्घुस में आम होती जा रही है, जिसे कहीं न कहीं प्रशासन की अनदेखी का परिणाम माना जा रहा है। शहर में ट्रैफिक पुलिस और RTO विभाग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जहां आम नागरिकों पर सख्ती से कार्रवाई की जाती है, वहीं बड़े ट्रांसपोर्टरों और कंपनियों के खिलाफ वैसी कार्रवाई नहीं होती, जिससे भेदभाव की स्थिति बनती है।
सूत्रों के अनुसार, “एंट्री” के नाम पर वसूली की चर्चाएं भी जोरों पर हैं। बताया जा रहा है कि 500 से 4000 रुपये तक की मासिक राशि कुछ लोगों के माध्यम से वसूली जाती है। इसमें कोयला, रेत, गिट्टी, डस्ट, ओबी, लोहा, भंगार, फल-सब्जी जैसे विभिन्न ट्रांसपोर्ट व्यवसाय शामिल हैं।
इसी कथित संरक्षण के चलते कई वाहन चालक नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते नजर आते हैं। ओवरलोडिंग, बिना त्रिपाल के डस्ट और रेत का परिवहन, खुले वाहनों का उपयोग, सड़कों पर अव्यवस्थित पार्किंग और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं अब आम हो गई हैं। इसका खामियाजा सीधे तौर पर आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
अब सवाल यह उठता है कि जनप्रतिनिधि, राजनीतिक दलों के नेता, पुलिस और RTO विभाग इस पूरे मामले पर कब तक चुप्पी साधे रहेंगे? क्या इन समस्याओं पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर आम जनता को ही हेलमेट, सीट बेल्ट, PUC, इंश्योरेंस जैसे नियमों के नाम पर परेशान किया जाता रहेगा?
घुग्घुस की जनता अब जवाब चाहती है—क्या शहर में सड़क सुरक्षा और कानून का राज स्थापित होगा, या फिर ऐसे ही मनमानी का दौर चलता रहेगा?




