घुग्घुस में गंदगी का राज, स्वच्छता के दावे बेनकाब
(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस नगर परिषद क्षेत्र के प्रभाग क्रमांक 01 अंतर्गत शास्त्रीनगर और आंबेडकर नगर आज बदहाली और उपेक्षा की तस्वीर बने हुए हैं। गलियों में फैली गंदगी, ओवरफ्लो होती नालियां और उन्हीं गंदी नालियों के भीतर से गुजरती पेयजल पाइप लाइन—यह दृश्य किसी पिछड़े इलाके का नहीं, बल्कि “विकास” के दावों से भरे नगर का है।
सबसे गंभीर और चौंकाने वाली बात यह है कि नागरिकों को मजबूरी में उसी पानी को पीना पड़ रहा है, जो गंदे नालों के बीच से होकर उनके घरों तक पहुंच रहा है। यह हालात न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करते हैं, बल्कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ भी हैं।
क्षेत्र में चर्चा है कि नालियों की देखरेख और जल व्यवस्था की जिम्मेदारी वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) की है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर नजर आती है। वहीं दूसरी ओर नगर परिषद के नवनियुक्त नगराध्यक्ष, पानी पुरवठा एवं आरोग्य सभापति तथा मुख्याधिकारी की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है। क्या यह चुप्पी लाचारी है या उदासीनता?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शिकायतें की गईं, लेकिन न तो नालियों की समुचित सफाई हुई और न ही पेयजल पाइप लाइन को सुरक्षित स्थानांतरित करने की कोई ठोस कार्रवाई। नतीजा—बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है और लोगों का भरोसा प्रशासन से उठता जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या घुग्घुस को कभी गंदगी और दूषित पानी से निजात मिलेगी? या फिर हर बार की तरह यह मुद्दा भी फाइलों और बैठकों तक सिमट कर रह जाएगा, और नागरिक उसी गंदगी के बीच अपनी जिंदगी काटने को मजबूर रहेंगे?
आज पूरा क्षेत्र जवाब चाहता है। जिम्मेदारों की चुप्पी कब टूटेगी, यह देखने के लिए अब घुग्घुस की निगाहें प्रशासन और संबंधित विभागों पर टिकी हुई हैं।




