(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस, चंद्रपुर | कोयला नगरी चंद्रपुर में शनिवार देर शाम एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने वेकोलि (WCL) और उससे जुड़ी मजदूर यूनियन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीबीआई की टीम ने वेकोलि में सक्रिय एक मजदूर यूनियन के क्षेत्रीय स्तर के नेता को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी वेकोलि के राजीव रतन अस्पताल के पास की गई, जो अपने आप में व्यवस्था की सड़ांध को उजागर करती है।
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, मामला दो कामगारों के म्यूचुअल ट्रांसफर से जुड़ा है। आरोप है कि संबंधित यूनियन नेता ने इस ट्रांसफर के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की थी। मजबूरी में फंसे कामगार रिश्वत देने को तैयार नहीं हुए और हिम्मत दिखाते हुए सीधे सीबीआई कार्यालय का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद सीबीआई ने सुनियोजित तरीके से जाल बिछाया और शनिवार देर शाम आरोपी नेता को रिश्वत लेते हुए धर दबोचा।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत चंद्रपुर में औपचारिक कार्रवाई के बाद नागपुर ले जाए जाने की प्राथमिक जानकारी है। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि सीबीआई ने आरोपी के घर से कुछ दस्तावेज जांच के लिए जब्त किए हैं, जिससे इस मामले के तार कहीं ज्यादा गहरे होने की आशंका जताई जा रही है।
सवाल सिर्फ एक नेता का नहीं, पूरे सिस्टम का है
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह इस यूनियन नेता का पहला अपराध है, या फिर वह लंबे समय से कामगारों की मजबूरी को अपनी कमाई का जरिया बनाता रहा है? अगर एक ट्रांसफर के लिए खुलेआम रिश्वत मांगी जा रही थी, तो यह मानना मुश्किल नहीं कि ऐसे कई और मामले दबे पड़े होंगे।
यह भी सवाल उठना लाज़मी है कि क्या इस खेल में अन्य यूनियन पदाधिकारी शामिल हैं? क्या वेकोलि के कुछ अधिकारी या कर्मचारी भी इस दलदल में फंसे हैं? और क्या अब सीबीआई की रेड में और बड़े नाम सामने आएंगे?
मजदूर यूनियन की साख पर करारा तमाचा
जिस यूनियन को मजदूरों की आवाज़ और हक की लड़ाई का प्रतीक माना जाता है, उसी यूनियन का नेता अगर दलाली और रिश्वतखोरी में लिप्त पाया जाता है, तो यह पूरे संगठन के लिए शर्मनाक है। यह घटना साबित करती है कि कैसे कुछ तथाकथित नेता मजदूरों की मजबूरी को ब्लैकमेलिंग और उगाही का हथियार बना लेते हैं।
फिलहाल यह पूरा मामला गोपनीय तरीके से जांच के दायरे में है और आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। लेकिन इतना तय है कि यह गिरफ्तारी केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस भ्रष्ट व्यवस्था की पोल खोलने की शुरुआत है, जो वर्षों से पर्दे के पीछे फल-फूल रही थी।
जैसे-जैसे सीबीआई का कानूनी शिकंजा कसता जाएगा, इस मामले से जुड़े और चौंकाने वाले खुलासे होने की पूरी संभावना है। जनता और कामगार अब यह जानना चाहते हैं कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ एक बलि का बकरा बनाकर खत्म हो जाएगी, या फिर भ्रष्टाचार की जड़ों तक पहुंचकर सफाई होगी।




