प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : औद्योगिक नगरी घुग्घुस का बस स्थानक परिसर इन दिनों गंभीर यातायात अव्यवस्था, अवैध पार्किंग और फुटपाथ अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहा है। बस स्थानक के आसपास हॉस्पिटल, रेलवे स्टेशन, पुलिस स्टेशन, पेट्रोल पंप, कंपनी कार्यालय, मार्केट लाइन, राजनीतिक दलों के कार्यालय, होटल, टपरी और फुटपाथ बाजार होने के कारण यहां दिनभर भारी भीड़ रहती है। बावजूद इसके, व्यवस्थित पार्किंग की कोई ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही है।
घुग्घुस – वणी तथा घुग्घुस – पडोली मार्ग पर वाहन चालक खुलेआम सड़क किनारे वाहन खड़े कर रहे हैं। इसका सीधा असर ट्रैफिक सिग्नल के आसपास यातायात पर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि कई बार बसों और बड़े वाहनों को निकलने तक में परेशानी हो रही है, जबकि आम नागरिकों और पैदल यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है।

स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भी भारी भ्रम और नाराज़गी है कि परिसर में लगाया गया ट्रैफिक सिग्नल आखिर किसके नियंत्रण में है। यह सिग्नल वाहतुक विभाग द्वारा स्थापित किया गया है या किसी निजी कंपनी द्वारा, इसकी स्पष्ट जानकारी तक उपलब्ध नहीं है। सबसे गंभीर बात यह है कि सिग्नल मौजूद होने के बावजूद ट्रैफिक नियमों का पालन करवाने वाला कोई नजर नहीं आता।
फुटपाथों पर बढ़ते अस्थायी बाजार और दुकानों ने समस्या को और विकराल बना दिया है। जिन स्थानों पर वाहन पार्किंग की व्यवस्था होनी चाहिए थी, वहां अब टपरी, सब्जी विक्रेता और अस्थायी व्यापारियों का कब्जा दिखाई दे रहा है। नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि नगर परिषद के तत्कालीन मुख्याधिकारी ने आखिर किस आधार पर इन व्यापारियों को अनुमति दी थी? यदि यह व्यापार वैध है तो पहले इन्हें हटाया क्यों गया था, और यदि अवैध है तो आज तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
कानून व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर भी कई गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। ट्रैफिक विभाग अवैध पार्किंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा? पेट्रोल पंप के आसपास सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जहां वाहनों की भीड़ और अवैध ठेले किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं।
नागरिकों का कहना है कि यदि भविष्य में कोई बड़ा हादसा, आगजनी या दुर्घटना होती है, तो क्या ट्रैफिक विभाग, नगर परिषद, PWD, कंपनी प्रबंधन और अवैध पार्किंग को संरक्षण देने वाले लोग इसकी जिम्मेदारी लेंगे? क्या संबंधित अधिकारियों पर नियमों के तहत मामला दर्ज होगा, या फिर हर बार की तरह “दुर्घटना” कहकर मामले को दबा दिया जाएगा?
घुग्घुस की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहती है। अवैध पार्किंग, फुटपाथ अतिक्रमण और ट्रैफिक अव्यवस्था पर तत्काल कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह समस्या किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।




