पूर्व उपसरपंच ने सौंपा निवेदन
(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस (चंद्रपुर) : घुग्घुस ग्राम पंचायत व नगरपरिषद क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से कार्यरत रोजंदारी मजदूरों को महाराष्ट्र शासन द्वारा निर्धारित ‘किमान वेतन’ न दिए जाने का गंभीर मुद्दा फिर एक बार उठ खड़ा हुआ है। इसी संदर्भ में घुग्घुस ग्राम पंचायत के पूर्व उपसरपंच श्री सुधाकर गणपत बांदुरकर ने 10 दिसंबर 2025 को नगरपरिषद घुग्घुस प्रशासन को विस्तृत निवेदन सौंपते हुए शासनानुसार वेतन लागू करने की मांग की है।
निवेदन में कहा गया है कि वर्ष 2021 से नगरपरिषद घुग्घुस में कार्यरत महिला एवं पुरुष मजदूरों की संख्या 40 से 50 के बीच है, जिनमें कई कर्मियों को 8 से 10 वर्ष तथा कुछ को 10 से 12 वर्ष से अधिक समय से सेवा देते हुए काम का अनुभव है। इसके बावजूद उन्हें महाराष्ट्र शासन द्वारा निर्धारित किमान वेतन अधिनियम, 1948 तथा महाराष्ट्र शासन के नवीनतम आदेश (6 मार्च 2025) के अनुसार वेतन नहीं मिल रहा है।
निवेदन के मुख्य बिंदु—
नगरपरिषद क्षेत्र ‘परिसंवाद-3’ श्रेणी में आने के कारण मजदूरों को शासनानुसार निर्धारित कुशल, अर्ध-कुशल व अकुशल श्रेणी के अनुसार किमान वेतन देय है, परंतु वास्तविकता में मजदूरों को इससे कम वेतन दिया जा रहा है।
8 से 12 वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मियों को उच्च श्रेणी (Skilled / Semi-skilled) में समायोजित कर वेतन तय होना चाहिए।
बीते वर्षों में कम वेतन मिलने के कारण मजदूरों को हुए वित्तीय नुकसान की बकाया राशि (Arrears) शासन नियम अनुसार दी जाए।
मजदूरों के सेवा अभिलेख, उपस्थिति, कार्यप्रमाण पत्र एवं वर्गीकरण की प्रक्रिया व्यवस्थित रूप से पूर्ण करने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए जाएं।
सुधाकर बांदुरकर ने निवेदन में कहा कि नगरपरिषद घुग्घुस में लंबे समय से कार्यरत मजदूरों ने पूरी निष्ठा से सेवा दी है। शासन के नियमों के अनुसार किमान वेतन न मिलना अन्यायपूर्ण है। प्रशासन तुरंत सकारात्मक कार्रवाई करते हुए सभी मजदूरों को उनका वैध हक दिलाए।
निवेदन की प्रतियाँ जिला प्रशासन, नगरविकास विभाग, पालकमंत्री कार्यालय और श्रम आयुक्त कार्यालय को भी भेजी गई हैं।




