(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस, चंद्रपुर : नगर परिषद घुग्घुस में जारी ई-निविदा सूचना क्रमांक 3767/2026 को लेकर सियासी और प्रशासनिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। वित्त, नियोजन व सांस्कृतिक सभापति रविश विनय सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए घोषणा की है कि वे सोमवार, 2 मार्च 2026 को मुख्याधिकारी, नगर परिषद घुग्घुस, चंद्रपुर को “अंतिम चेतावनी एवं स्पष्टीकरण” संबंधी पत्र सौंपेंगे।
एक स्थानीय संवाददाता से बातचीत में उन्होंने निविदा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्षदों और नियोजन समिति की अनदेखी कर प्रशासन मनमानी कर रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
शर्त क्रमांक 4 पर सीधा हमला
सभापति ने विशेष रूप से निविदा की शर्त क्रमांक 4 को विवादास्पद बताया। इस शर्त में मुख्याधिकारी को “बिना कारण बताए निविदा रद्द करने का अधिकार” दिया गया है। सिंग का आरोप है कि इस तरह की शर्त पारदर्शिता के बजाय संदेह को जन्म देती है और संभावित भ्रष्टाचार के लिए रास्ता खोलती है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के सिद्धांतों के अनुसार हर प्रशासनिक निर्णय तर्कसंगत और कारणयुक्त होना चाहिए, अन्यथा वह न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है।
नियोजन समिति की भूमिका पर सवाल
उन्होंने स्पष्ट किया कि Maharashtra Municipal Council Act के अनुसार विकास कार्यों की योजना और उसकी प्राथमिकताएं तय करना नियोजन समिति का अधिकार है। बिना समिति की बैठक और चर्चा के सीधे निविदा निकालना न केवल प्रक्रिया का उल्लंघन है, बल्कि परिषद की सामूहिक जिम्मेदारी को भी कमजोर करता है।
सभापति ने आरोप लगाया कि वित्तीय सीमाओं और वैधानिक प्रक्रिया की अनदेखी कर प्रशासनिक स्तर पर जल्दबाजी दिखाई गई है, जिससे पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय ठेकेदारों की उपेक्षा का आरोप
निविदा के पानी आपूर्ति से जुड़े कार्यों (आइटम क्रमांक 1 एवं 3) को लेकर भी उन्होंने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि ऐसे कार्य सीधे तौर पर स्थानीय नागरिकों की सुविधा और रोजगार से जुड़े हैं। अनुभवी स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता न देना और बाहरी एजेंसियों को काम देने की कथित कोशिश जनहित के खिलाफ है।
48 घंटे की समयसीमा, वरना कानूनी लड़ाई
रविश विनय सिंह ने पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण नहीं दिया गया और नियोजन समिति की बैठक नहीं बुलाई गई, तो वे निम्न कदम उठाएंगे—
धारा 308 के तहत जिला कलेक्टर, चंद्रपुर को पत्र लिखकर निविदा पर रोक की मांग। नागपुर खंडपीठ में जनहित याचिका (PIL) दायर करना। आम सभा में मुख्याधिकारी के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव लाना।
प्रशासन की चुप्पी, बढ़ता विवाद
इस पूरे मामले में नगर परिषद प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। परिषद के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यदि समय रहते संवाद स्थापित नहीं हुआ, तो मामला जिला प्रशासन और न्यायालय तक पहुंच सकता है।
घुग्घुस नगर परिषद में उठे इस विवाद ने एक बार फिर निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि मुख्याधिकारी की ओर से क्या जवाब आता है और यह टकराव किस दिशा में आगे बढ़ता है।




