(प्रणयकुमार बंडी)
चंद्रपुर जिले में इन दिनों एक नगर सेवक को लेकर शहरभर में जबरदस्त चर्चा छिड़ी हुई है। खुद को समाजसेवक और बुद्धिजीवी बताने वाले इस जनप्रतिनिधि पर अब गंभीर आरोपों की परतें खुलती नजर आ रही हैं। मामला एक युवती से जुड़ा है, जिसने इस नगर सेवक को उसके व्यवहार के लिए सख्त सबक सिखाया।
स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, नगर सेवक विवाह प्रस्ताव लेकर युवती के घर पहुंचा था, रिश्ता तय होने की बातें भी सामने आईं, लेकिन बाद में उसी नगर सेवक द्वारा रिश्ता तोड़ने की खबर फैल गई। इसके बाद हालात ने ऐसा मोड़ लिया कि युवती ने सार्वजनिक रूप से उसका विरोध किया, जिससे पूरे शहर में सनसनी फैल गई।
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल उस नगर सेवक की छवि पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उसके समर्थकों और कथित पार्टी कार्यकर्ताओं की भूमिका पर भी उंगलियां उठने लगी हैं। आरोप है कि कुछ कार्यकर्ता लगातार नगर सेवक का बचाव करने में लगे हैं और मामले को दबाने की कोशिश हो रही है।
चर्चाओं में यह भी सामने आ रहा है कि नगर सेवक का किसी अन्य महिला के साथ संबंध होने की बात कही जा रही है, और उसी के चलते युवती को बदनाम कर मामले से पीछा छुड़ाने की साजिश रची गई। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जनमानस में यह मुद्दा तेजी से फैल रहा है।
घटना के समय कुछ अन्य वरिष्ठ नगर सेवक भी मौके पर मौजूद थे, लेकिन मामले की गंभीरता ऐसी थी कि कोई हस्तक्षेप करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। यह सवाल अब और भी गहरा हो गया है कि क्या ऐसे जनप्रतिनिधि वास्तव में जनता के हितों की रक्षा कर सकते हैं?
शहर के नागरिक अब खुलकर पूछ रहे हैं — क्या राजनीतिक दल इस मामले में निष्पक्ष जांच करेंगे? क्या पीड़ित युवती को न्याय मिलेगा? या फिर यह मामला भी राजनीतिक दबाव और बदनामी के खेल में दबा दिया जाएगा?
अब नजरें प्रशासन और शासन के जिम्मेदार अधिकारियों पर टिकी हैं। क्या वे इस मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करेंगे? क्या जनप्रतिनिधि के पद की गरिमा बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे?
फिलहाल, चंद्रपुर की सियासत में यह मुद्दा गर्म है और आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरे जिले की निगाहें टिकी हुई हैं।




