प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर । पिछले तीन-चार वर्षों से ओवरब्रिज निर्माण के नाम पर अधर में लटका घुग्घुस-तड़ाली मार्ग अब आम नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बन चुका है। बिना डांबरीकरण और नियमित मेंटनेंस के यह सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है, जिससे रोजाना हजारों राहगीरों को धूल, मिट्टी, गड्ढों और फिसलन भरे रास्तों से जूझना पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस मार्ग की हालत इतनी खराब हो गई है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से उड़ने वाली धूल लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर डाल रही है। खासकर बुजुर्गों और दुपहिया चालकों में कमर दर्द और अन्य शारीरिक समस्याओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस गंभीर समस्या के बावजूद लोक निर्माण विभाग (PWD), स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासन और पुलिस—सभी जिम्मेदार संस्थाएं मूकदर्शक बनी हुई हैं। जनता का आरोप है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद न तो सड़क की मरम्मत की गई और न ही कोई ठोस योजना सामने आई।
घुग्घुस में अब यह सवाल तेज़ी से उठने लगा है कि क्या जनता की समस्याओं को सुनने वाला कोई बचा भी है? चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता आज पूरी तरह खामोश क्यों हैं? क्या आम नागरिकों को यूं ही धूल और गड्ढों में जिंदगी बितानी पड़ेगी?
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस मार्ग का पुनर्निर्माण जल्द से जल्द PWD के माध्यम से कराया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके। लेकिन जिस तरह से शासन-प्रशासन की उदासीनता सामने आ रही है, उससे यह साफ है कि जनता की पीड़ा फिलहाल किसी की प्राथमिकता में नहीं है।
अगर जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो यह मुद्दा आने वाले समय में जनआंदोलन का रूप ले सकता है।




