कोलकाता : पश्चिम बंगाल की एकमात्र एक्टिव कोल्ड स्टोरेज, वेस्ट बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन की ओर से सोमवार को कोलकाता के न्यू टाउन में ताज ताल कुटीर होटल में 61वां एनुअल जनरल मीटिंग का आयोजन किया गया था। जिसका उद्घाटन मुख्य अतिथि बेचाराम मन्ना (माननीय एमआईसी डिपार्टमेंट ऑफ़ एग्रीकल्चरल मार्केटिंग, पश्चिम बंगाल) और प्रदीप कुमार मजूमदार, (माननीय एमआईसी, डिपार्टमेंट ऑफ़ पंचायत एंड रूरल डेवलपमेंट, पश्चिम बंगाल) ने संयुक्त रूप से किया। इस कार्यक्रम में सुनील कुमार राणा (अध्यक्ष, डब्लूबीसीएसए), सुभाजीत साहा (उपाध्यक्ष, डब्लूबीसीएसए), राजेश कुमार बंसल, (एक्स-प्रेसिडेंट ऑफ़ डब्लूबीसीएसए), सोहनलाल सेठिया, पतित पावन दे, तरुण कांति घोष, गोबिंद कजारिया (पूर्व अध्यक्ष, डब्लूबीसीएसए), दिलीप चटर्जी, कौशिक कुंडू, प्रदीप लोढ़ा, मानिक चंद बैद, जगमोहन सारदा (डिस्ट्रिक्ट कमेटियों के चेयरमैन, डब्लूबीसीएसए) के साथ अन्य सम्मानीय व्यक्ति मौजूद थे।
इस मौके पर वेस्ट बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील कुमार राणा ने कहा, हमारा एसोसिएशन छह दशकों से ज़्यादा समय से गर्व के साथ पश्चिम बंगाल में खेती-बारी से जुड़े लोगों की सेवा कर रहा है। संगठन के 20वें प्रेसिडेंट के तौर पर मेरा पक्का मानना है, कि कोल्ड स्टोरेज इंडस्ट्री को गांव की इकॉनमी में अहम योगदान देते रहना चाहिए। इस सीज़न में, हमारे राज्य पश्चिम बंगाल में लगभग 140 लाख मीट्रिक टन आलू पैदा होने की उम्मीद है। सीज़न 2025 में सरकार ने आलू खरीद स्कीम के तहत 900 रुपए प्रति क्विंटल पर एमएसपी दिया था, जबकि एवरेज मार्केट प्राइस गिरकर लगभग 600 रुपए प्रति क्विंटल हो गया, जिससे 72 लाख मीट्रिक टन के बचाए हुए स्टॉक पर लगभग 2,200 करोड़ से ज़्यादा का नुकसान होने का अंदाज़ा है। इंटर-स्टेट मार्केटिंग और प्राइस स्टेबिलाइज़ेशन के लिए तुरंत पॉलिसी सपोर्ट के बिना किसानों और कोल्ड स्टोरेज ऑपरेटरों दोनों को गंभीर फाइनेंशियल स्ट्रेस का सामना करना पड़ता रहेगा।
मीडिया से बात करते हुए वेस्ट बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट सुभाजीत साहा ने कहा, लगातार बढ़ते पावर टैरिफ, ज़्यादा लेबर और मेंटेनेंस कॉस्ट, महंगे कैपिटल और सख्त कम्प्लायंस जरूरतों की वजह से कोल्ड स्टोरेज का काम बहुत महंगा हो गया है। रेंटल चार्ज में सही बदलाव और लाइसेंस की वैलिडिटी को पांच साल तक बढ़ाने से बिज़नेस करने में बिना रुके मदद भी मिलेगी। कोल्ड स्टोरेज में लगभग 72 लाख मीट्रिक टन आलू स्टोर है और मार्केट प्राइस औसतन सिर्फ़ 600 रुपए प्रति क्विंटल है, जबकि एमएसपी एमपी 900 रुपए है, इस कारण 2025 में इस सेक्टर को 2,200 करोड़ से ज़्यादा का नुकसान हुआ है। किसानों और स्टोरेज ऑपरेटरों पर और ज़्यादा दबाव न पड़े, इसके लिए टारगेटेड पॉलिसी सपोर्ट और आसान इंटर-स्टेट मूवमेंट ज़रूरी है।
एसोसिएशन ने कई खास उपायों का सुझाव दिया, जिनमें शामिल हैं:
आलू की एक राज्य से दूसरे राज्य में ढुलाई के लिए ट्रांसपोर्ट सब्सिडी
पड़ोसी राज्यों के साथ बायर-सेलर मीटिंग
मिड-डे मील और पीडीएस में आलू को शामिल करना
एक्सपोर्ट पर आधारित खेती और विदेशी मार्केट तक पहुंच
बढ़ती इनपुट लागत के हिसाब से कोल्ड स्टोरेज के किराए में बदलाव
एसोसिएशन ने बिना डिलीवर हुए स्टॉक के निपटान के लिए आसान कानूनी प्रक्रियाओं, पुराने रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में बदलाव और बिजनेस को आसान बनाने के लिए कोल्ड स्टोरेज लाइसेंस की वैलिडिटी को पांच साल तक बढ़ाने की भी अपील की। सहयोग के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए, एसोसिएशन ने भरोसा जताया कि सरकार और इंडस्ट्री के स्टेकहोल्डर्स के बीच अच्छी बातचीत से किसानों, व्यापारियों और कोल्ड स्टोरेज ऑपरेटरों, सभी के लिए टिकाऊ समाधान निकलेगा।




