चंद्रपुर। चंद्रपूर महानगरपालिका में आयुक्त की अध्यक्षता में National Clean Air Programme (एनसीएपी) के तहत एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर चिंता जताते हुए धूल नियंत्रण, कचरा प्रबंधन में सुधार, हरित उपक्रमों को बढ़ावा देने और जनभागीदारी से प्रदूषण नियंत्रण मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
हालांकि सवाल यह है कि क्या ये निर्देश कागज़ों से निकलकर सड़कों तक पहुंच पाएंगे? चंद्रपुर लंबे समय से औद्योगिक गतिविधियों और बढ़ती धूल-धुएं की समस्या से जूझ रहा है। शहर के कई हिस्सों में हवा की गुणवत्ता लगातार चिंता का विषय बनी हुई है, लेकिन ठोस और दिखाई देने वाली कार्रवाई अब तक सीमित ही नजर आई है।
बैठक में अधिकारियों को समन्वय के साथ काम करने और तय समयसीमा में परिणाम देने को कहा गया। प्रशासन ने “स्वच्छ हवा – निरोगी जीवन” को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए नागरिकों से भी सहयोग की अपील की।
लेकिन जनता का सीधा सवाल है—सड़कों पर उड़ती धूल कब थमेगी? खुले में कचरा जलाने पर सख्ती कब होगी? प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर ठोस कार्रवाई कब दिखेगी?
यदि एनसीएपी के तहत घोषित योजनाएं सख्ती और पारदर्शिता के साथ लागू नहीं की गईं, तो बैठकें केवल औपचारिकता बनकर रह जाएंगी। शहर को साफ हवा चाहिए—बयान नहीं, परिणाम चाहिए।




