प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : नगर परिषद चुनाव 2025 के दौरान सत्ता पक्ष द्वारा जारी किए गए चुनावी जाहिरनामे में जनता से विकास और जनकल्याण से जुड़े कई आकर्षक वादे किए गए थे। इसी जाहिरनामे के 19वें मुद्दे में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि “नवनिर्मित ग्रामीण रुग्णालय में उपचार व्यवस्था पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।” लेकिन चुनाव के बाद जमीनी हकीकत इस वादे पर गंभीर सवाल खड़े करती दिखाई दे रही है।
घुग्घुस और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों के लिए कोरोना काल में जिस ग्रामीण अस्पताल की नींव रखी गई थी, उसका निर्माण कार्य अब लगभग पूरी तरह से पूर्ण हो चुका है। इसके बावजूद अस्पताल में अपेक्षित स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। परिणामस्वरूप घुग्घुस सहित आसपास के गांवों की बड़ी आबादी आज भी बेहतर चिकित्सा सुविधाओं से वंचित है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अस्पताल की इमारत तैयार होने के बाद भी यदि स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो पा रही हैं, तो इसके लिए शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। नगर परिषद प्रशासन, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी लोगों में असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है।
शहर में चर्चा है कि विकास के दावों और वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। एक ओर चुनावी मंचों से स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के वादे किए गए, वहीं दूसरी ओर तैयार अस्पताल जनता के लिए पूरी तरह उपयोगी नहीं बन पाया है। ऐसे में नागरिक यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर इस महत्वपूर्ण परियोजना को शुरू करने में देरी क्यों हो रही है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
नियमों का पालन सुनिश्चित करना, आवश्यक चिकित्सा स्टाफ की नियुक्ति करना तथा अस्पताल को पूर्ण रूप से कार्यरत बनाना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। यदि इन प्रक्रियाओं में लापरवाही बरती जाती है तो उच्च स्तर पर शिकायत और विभागीय जांच की मांग उठना भी स्वाभाविक माना जा रहा है। हालांकि स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं देने की चर्चा भी आम है।
विकास योजनाओं, टाउन प्लानिंग और जनकल्याण संबंधी दावों के बीच स्वास्थ्य जैसे मूलभूत विषय पर बनी यह स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाएं किसी भी क्षेत्र के विकास का महत्वपूर्ण आधार होती हैं और इसके साथ किसी भी प्रकार की उपेक्षा सीधे जनता के हितों को प्रभावित करती है।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि जाहिरनामे में किए गए वादे के अनुसार नवनिर्मित ग्रामीण अस्पताल में उपचार व्यवस्था को प्राथमिकता देने का दावा आखिर कितना सफल साबित हुआ है? चुनावी घोषणा और जमीनी वास्तविकता के बीच की दूरी आने वाले समय में और स्पष्ट होगी। जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि अगले पांच वर्षों में सत्ता पक्ष अपने वादों को धरातल पर उतार पाता है या नहीं। घुग्घुस की जनता के लिए यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल बन चुका है।




