प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर: जनता की सेवा, विकास और सामाजिक जिम्मेदारी का दावा करने वाले जनप्रतिनिधियों से आम नागरिक बेहतर आचरण की अपेक्षा रखते हैं। लेकिन घुग्घुस में सामने आए एक विवाद ने स्थानीय राजनीति और नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। एक अपक्ष निर्वाचित नगरसेवक पर एक महिला के साथ कथित प्रेम संबंधों के विवाद को लेकर मारपीट करने का आरोप लगा है, जिसके बाद पूरे शहर में इस मामले की चर्चा तेज हो गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार (4 जून) की सुबह लगभग 10 बजे पीड़ित महिला लॉयड्स कॉलोनी के पास एक केबी कार्यालय के प्रवेश द्वार के समीप खड़ी थी। आरोप है कि उसी दौरान संबंधित नगरसेवक वहां पहुंचे और महिला से पूछताछ करते हुए उस पर हाथ-मुक्कों से हमला कर दिया। इस घटना में महिला के सिर पर चोट आने की बात सामने आई है।
घटना के बाद महिला सीधे घुग्घुस पुलिस थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर उक्त नगरसेवक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 118(1), 351(2) और 352 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, नगरसेवक और महिला के बीच पिछले लगभग दो वर्षों से प्रेम संबंध होने की चर्चा है। महिला का आरोप है कि पिछले कुछ समय से नगरसेवक उस पर संदेह कर रहे थे और इसी कारण अक्सर विवाद तथा गाली-गलौज की घटनाएं होती थीं। गुरुवार की मारपीट भी कथित रूप से इसी विवाद का परिणाम बताई जा रही है।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शिकायत दर्ज होने के बाद अन्य नगरसेवक भी थाने पहुंचे। हालांकि, किसी ने भी मीडिया के सामने खुलकर प्रतिक्रिया देने से परहेज किया। यह चुप्पी भी अब शहर में चर्चा का विषय बन गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि चुनाव जीतने के महज छह महीने के भीतर यदि किसी जनप्रतिनिधि का नाम इस तरह के विवाद में सामने आता है, तो जनता के विश्वास का क्या होगा? यदि आरोप सही साबित होते हैं तो क्या राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर कोई जवाबदेही तय होगी?
शहर में अब कई सवाल उठ रहे हैं। क्या पीड़ित महिला को न्याय मिलेगा? क्या महिला जनप्रतिनिधि और महिला संगठन खुलकर सामने आएंगे? क्या नगर परिषद का सत्तापक्ष और विपक्ष इस मामले में निष्पक्ष भूमिका निभाएंगे या राजनीतिक समीकरण हावी रहेंगे? क्या पुलिस निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करेगी या मामला सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा?
कानूनी जानकारों का मानना है कि जांच के दौरान पुलिस आवश्यकता पड़ने पर मोबाइल फोन, वाहन, कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच कर सकती है। ऐसे में मामले के कई नए पहलू सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल पूरे शहर की नजरें घुग्घुस पुलिस, नगर परिषद प्रशासन, मुख्याधिकारी, तहसील प्रशासन और जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। जनता यह देखना चाहती है कि कानून सभी के लिए समान है या फिर राजनीतिक पद और प्रभाव जांच की दिशा को प्रभावित करेंगे।
नोट: मामले में आरोप लगाए गए हैं और पुलिस जांच जारी है। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।




