प्रणयकुमार बंडी
घुग्घूस/चंद्रपुर : चंद्रपुर जिले के घुग्घूस पुलिस थाना क्षेत्र स्थित एक सीमेंट कंपनी में महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों के विभिन्न शहरों से लाया जाने वाला बदबूदार ठोस कचरा (वेस्ट) इन दिनों स्थानीय नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनता जा रहा है। कंपनी में ईंधन एवं अन्य औद्योगिक उपयोग के लिए लाए जाने वाले इस कचरे का परिवहन खुलेआम नियमों की अनदेखी करते हुए किया जा रहा है, जिससे पूरे शहर में दुर्गंध और गंदगी फैल रही है।
गुरुवार सुबह (16 जुलाई 2026) घुग्घूस पुलिस स्टेशन के सामने रेलवे क्रॉसिंग के पास एक कचरा वाहन से सड़क पर कचरा गिरता हुआ दिखाई दिया। वाहन से उठ रही तेज दुर्गंध के कारण आसपास से गुजरने वाले लोगों, दुकानदारों और वाहन चालकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि ऐसे वाहन आए दिन शहर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए बदबू फैलाते हैं और रास्ते में कचरा गिराते हैं।
शिवसेना (शिंदे गुट) के शहर प्रमुख महेश डोंगे ने इस पूरे मामले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह सीधे-सीधे आम नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने मांग की कि बदबूदार कचरा ढोने वाले वाहनों के शहर में प्रवेश पर तत्काल नियंत्रण लगाया जाए। इन वाहनों के लिए निश्चित समय निर्धारित किया जाए, ताकि दिनभर नागरिकों को दुर्गंध और प्रदूषण का सामना न करना पड़े। साथ ही कंपनी को उसके निर्धारित बायपास ट्रांसपोर्ट मार्ग का अनिवार्य रूप से पालन करना चाहिए, जिससे शहर के भीतर ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या भी कम हो सके।
उन्होंने नगर परिषद के मुख्याधिकारी, स्वच्छता एवं आरोग्य सभापति तथा संबंधित प्रशासनिक विभागों से मांग की कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कंपनी और परिवहनकर्ताओं को नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश जारी किए जाएं। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
वहीं, आम नागरिकों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन को ऐसे वाहनों पर विशेष निगरानी रखनी चाहिए। शहर के मुख्य मार्गों पर बिना अनुमति या नियमों के विरुद्ध चलने वाले कचरा वाहनों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए तथा आवश्यक होने पर ‘नो एंट्री’ व्यवस्था लागू की जाए। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो दुर्गंध, गंदगी और संभावित स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और गंभीर रूप ले सकती हैं।
स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि औद्योगिक उपयोग के लिए लाए जाने वाले कचरे के परिवहन संबंधी नियम निर्धारित हैं, तो उनका पालन क्यों नहीं कराया जा रहा? क्या संबंधित विभाग नियमित निरीक्षण कर रहा है? यदि नहीं, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
अब देखना यह होगा कि नगर परिषद, पुलिस प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभाग और संबंधित कंपनी इस गंभीर जनसमस्या पर क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल घुग्घूस के नागरिकों की एक ही मांग है—शहर को बदबूदार कचरा वाहनों से राहत मिले, नियमों का सख्ती से पालन हो और घुग्घूस को स्वच्छ, सुरक्षित एवं प्रदूषणमुक्त बनाया जाए।




