प्रणयकुमार बंडी
घुग्घूस/चंद्रपुर: घुग्घूस के राजीव रतन चौक स्थित निर्माणाधीन उड़ानपुल (फ्लाईओवर) पर बुधवार (15 जुलाई 2026) रात लगभग 8 से 8:30 बजे के बीच दो मोटरसाइकिलों की आमने-सामने हुई भीषण टक्कर में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। इस दर्दनाक हादसे के बाद क्षेत्र में सड़क सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर तीखी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
प्राप्त प्राथमिक जानकारी के अनुसार, एक बाइक सवार छत्रपति शिवाजी महाराज चौक की ओर से फ्लाईओवर पर जा रहा था, जबकि दूसरी बाइक सुभाषनगर की ओर से कथित रूप से विपरीत दिशा से आ रही थी। दोनों वाहनों की आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई। इस दुर्घटना में अंगत (प्राथमिक जानकारी के अनुसार) की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई, जबकि मोनू नामक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे उपचार के लिए चंद्रपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में नागरिक घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा किया और मामले की जांच शुरू कर दी है। मृतक एवं घायल की पूर्ण पहचान तथा दुर्घटना के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
हादसे के बाद उठे कई गंभीर सवाल
इस दुर्घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में चर्चा है कि निर्माणाधीन फ्लाईओवर और उसके आसपास सड़क सुरक्षा के मूलभूत मानकों की लंबे समय से अनदेखी की जा रही है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में प्रभावी स्पीड ब्रेकर, पर्याप्त चेतावनी संकेत, दिशा-निर्देशक बोर्ड, रिफ्लेक्टर, बैरिकेडिंग तथा यातायात नियंत्रण की समुचित व्यवस्था नहीं होने से तेज रफ्तार और अव्यवस्थित आवागमन लगातार दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि वणी मार्ग से चंद्रपुर की ओर जाने वाले गांधी नगर और सुभाष नगर क्षेत्र के कई नागरिक वर्षों से जिस मार्ग का उपयोग करते रहे हैं, फ्लाईओवर निर्माण के बाद भी उसी आदत के कारण कुछ वाहन चालक गलत दिशा (रॉन्ग साइड) से आने-जाने का जोखिम उठा रहे हैं। यदि वास्तव में ऐसा हो रहा है तो यह न केवल मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि संबंधित विभागों के लिए भी गंभीर चेतावनी का विषय है कि वहां पर्याप्त ट्रैफिक प्रबंधन और मार्गदर्शन क्यों नहीं किया गया।
सड़क पर अतिक्रमण और प्रशासनिक उदासीनता पर भी सवाल
स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि क्षेत्र में स्थित एक पेट्रोल पंप का कुछ हिस्सा सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए दृश्यता और आवागमन में बाधा उत्पन्न कर रहा है। यदि किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या सड़क सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित विभागों की जिम्मेदारी बनती है कि उसका विधिसम्मत परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करें।
नागरिकों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग (PWD), यातायात पुलिस, नगर परिषद तथा अन्य संबंधित विभागों द्वारा वर्षों से इस क्षेत्र में सड़क सुरक्षा संबंधी कमियों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। यदि किसी सड़क पर आवश्यक सुरक्षा मानकों, संकेतकों, बैरिकेडिंग या यातायात प्रबंधन की कमी पाई जाती है और उसके कारण दुर्घटनाएं होती हैं, तो संबंधित मामलों में जांच के आधार पर विभागीय जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।
कानून क्या कहता है?
सड़क निर्माण या मरम्मत के दौरान संबंधित एजेंसियों का दायित्व होता है कि वे सुरक्षा संकेतक, चेतावनी बोर्ड, प्रकाश व्यवस्था, बैरिकेडिंग तथा सुरक्षित यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करें। वहीं प्रत्येक वाहन चालक का भी कानूनी दायित्व है कि वह निर्धारित दिशा में, नियंत्रित गति से तथा यातायात नियमों का पालन करते हुए वाहन चलाए। किसी भी दुर्घटना में अंतिम जिम्मेदारी तथ्यों, साक्ष्यों और पुलिस जांच के आधार पर ही तय होती है।
लोगों की मांग
हादसे के बाद नागरिकों ने मांग की है कि इस पूरे क्षेत्र का संयुक्त सुरक्षा ऑडिट कराया जाए, रॉन्ग साइड आवागमन पर तत्काल रोक लगाई जाए, आवश्यक स्पीड कंट्रोल उपाय लागू किए जाएं, चेतावनी संकेत और बैरिकेडिंग लगाई जाए तथा यदि किसी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही या सड़क सुरक्षा मानकों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।




