प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : घुग्घुस नगर परिषद के सार्वत्रिक चुनाव 2025 में निर्वाचित हुए कुछ नगर सेवकों और नगर सेविकाओं के सामने अब जाति वैधता (Caste Validity) प्रमाणपत्र का मुद्दा गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। चुनाव परिणाम घोषित होने के लगभग पांच महीने बाद भी कुछ निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा आवश्यक जाति वैधता प्रमाणपत्र नगर परिषद कार्यालय में जमा नहीं किए जाने पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।
जानकारी के अनुसार, घुग्घुस नगर परिषद का चुनाव 20 दिसंबर 2025 को संपन्न हुआ था तथा 21 दिसंबर 2025 को परिणाम घोषित किए गए थे। आरक्षित प्रभागों से निर्वाचित उम्मीदवारों ने नामांकन के समय नियमानुसार छह माह के भीतर जाति वैधता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने का शपथपत्र और आश्वासन दिया था। महाराष्ट्र के प्रचलित नियमों के तहत यह दस्तावेज निर्धारित समयसीमा में जमा करना अनिवार्य माना जाता है।
इसके बावजूद, चुनाव परिणाम घोषित होने के पांच माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कुछ नगर सेवक और नगर सेविकाएं अपना जाति वैधता प्रमाणपत्र नगर परिषद कार्यालय में जमा नहीं कर सके हैं। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए मुख्याधिकारी निलेश राजणकर ने संबंधित जनप्रतिनिधियों को पत्र जारी कर निर्धारित समय के भीतर प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित जनप्रतिनिधि यह पत्र प्राप्त होने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर, अर्थात 8 जून 2026 तक अपना जाति वैधता प्रमाणपत्र नगर परिषद कार्यालय में जमा करें। प्रशासन की इस कार्रवाई ने स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ते समय छह महीने के भीतर प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने का वचन दिया था, तो अब तक यह प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं हो सकी? क्या प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया लंबित है या फिर नियमों के पालन में लापरवाही बरती गई है? इस पर जनमानस की नजरें टिकी हुई हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं किए गए, तो संबंधित जनप्रतिनिधियों की सदस्यता पर भी कानूनी और प्रशासनिक प्रश्न खड़े हो सकते हैं। फिलहाल नगर परिषद प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि नियमों के पालन में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
अब 8 जून की अंतिम तिथि नजदीक है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित जनप्रतिनिधि समय पर जाति वैधता प्रमाणपत्र जमा करते हैं या यह मामला आगे और विवाद तथा कानूनी पेचीदगियों का रूप लेता है।




