(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस, चंद्रपुर : शहर में इन दिनों शादी, नामकरण और अन्य शुभ अवसरों के दौरान जबरन वसूली की घटनाओं को लेकर आम नागरिकों में चिंता और असुरक्षा का माहौल बनता जा रहा है। आरोप है कि कुछ ‘कथित’ तृतीयपंथी समूह निमंत्रण या सूचना मिलते ही कार्यक्रम स्थलों और घरों में पहुंचकर पैसों की मांग करते हैं। कई मामलों में यह मांग स्वैच्छिक नहीं बल्कि दबावपूर्ण बताई जा रही है, जिससे परिवारों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कार्यक्रम के कुछ दिन बाद भी ये समूह सीधे घरों में पहुंच जाते हैं और रकम देने का दबाव बनाते हैं। ऐसे में सवाल उठना लाज़िमी है कि क्या शहर में कानून-व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है? क्या आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी नहीं है?
यह भी उल्लेखनीय है कि समाज के वास्तविक तृतीयपंथी समुदाय के अनेक सदस्य आज शिक्षा, व्यवसाय और विभिन्न पेशों में सम्मानजनक स्थान बना चुके हैं। वे सामाजिक मुख्यधारा में अपनी सकारात्मक पहचान स्थापित कर रहे हैं। ऐसे में कुछ ‘कथित’ तत्वों की गतिविधियों से पूरे समुदाय की छवि प्रभावित होना गंभीर चिंता का विषय है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि ये घटनाएं लगातार हो रही हैं, तो स्थानीय प्रशासन, पुलिस विभाग और जनप्रतिनिधि मौन क्यों हैं? क्या शिकायतें दर्ज नहीं हो रहीं, या दर्ज होने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही? यदि नागरिक भय या सामाजिक दबाव के कारण खुलकर सामने नहीं आ पा रहे, तो प्रशासन को स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए।
घुग्घुस जैसे शहर में यदि खुलेआम दबाव बनाकर वसूली की जा रही है और उस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा, तो यह शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सीधा प्रश्नचिन्ह है। कानून का राज तभी स्थापित होगा जब किसी भी नाम या पहचान के सहारे अवैध वसूली करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हैं या फिर आम नागरिकों को इसी तरह असहज परिस्थितियों में जीने के लिए छोड़ दिया जाएगा। शहरवासियों की मांग है कि इस विषय पर स्पष्ट नीति, निगरानी और त्वरित कार्रवाई की जाए, ताकि किसी भी समुदाय की आड़ में चल रही कथित वसूली की प्रवृत्ति पर रोक लग सके और सभी नागरिक सुरक्षित महसूस कर सकें।




