चंद्रपुर, महाराष्ट्र: पिछले कुछ दिनों से चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री का जन्मदिन “सप्ताहभर” मनाने की जोरशोर से तैयारी दिखाई दे रही है। वृक्षारोपण, मंदिरों में पूजन, रक्तदान शिविर, सफाई अभियान जैसे कार्यक्रमों के ज़रिए इस उत्सव को सेवा सप्ताह का स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है। मगर इस चमक-दमक के पीछे कुछ ऐसी तस्वीरें भी उभरकर सामने आ रही हैं जो पार्टी के अंदरूनी हालात की असली झलक देती हैं।
“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें वॉटरकैन दूंगा“—इस प्रकार के दृश्य इन आयोजनों में देखने को मिले, जो गंभीर सेवा भाव की बजाय प्रचार और प्रतिस्पर्धा की मानसिकता दर्शाते हैं।
कार्यक्रमों के आयोजन के दौरान जिस तरह से नेता एक-दूसरे से बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति और कार्यप्रदर्शन का प्रदर्शन कर रहे हैं, वह राजनीतिक गुटबाजी की ओर इशारा करता है। पार्टी के भीतर तीन अलग-अलग धड़ों की सक्रियता इतनी स्पष्ट हो गई है कि आम कार्यकर्ता ही असमंजस में हैं कि वे पार्टी के लिए काम कर रहे हैं या केवल किसी एक विधायक या गुट का महिमामंडन करने में लगे हैं।
स्थिति इतनी उलझ चुकी है कि जिलाध्यक्ष जैसे वरिष्ठ पद पर बैठे नेता भी मूकदर्शक की भूमिका में नजर आ रहे हैं। वे न तो अनुशासन कायम रखने की कोशिश कर रहे हैं, न ही कार्यकर्ताओं की उलझनों को सुलझाने का प्रयास। इसका सीधा असर कार्यकर्ताओं के मनोबल और पार्टी की साख पर पड़ रहा है।
कुछ कार्यकर्ता इस बात को लेकर परेशान हैं कि सेवा सप्ताह के नाम पर हो रहे इन आयोजनों में जनसेवा से ज़्यादा फोटो खिंचवाने और मीडिया में छाने की होड़ मची हुई है। यह भी देखा गया है कि कुछ स्थानों पर एक ही तरह के कार्यक्रम अलग-अलग गुटों द्वारा दोहराए गए, जिससे संसाधनों की बर्बादी के साथ-साथ आपसी टकराव की स्थिति भी बनी।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या यह “सेवा सप्ताह” वास्तव में आम जनता के हित के लिए आयोजित किया जा रहा है, या फिर यह सिर्फ एक राजनैतिक शक्ति प्रदर्शन बनकर रह गया है?
चंद्रपुर की जनता और कार्यकर्ता अब इस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इन अंतर्विरोधों और गुटबाजी पर कैसे लगाम लगाता है, और क्या वास्तव में सेवा की भावना को प्राथमिकता दी जाती है या नहीं।





