(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस, चंद्रपुर : महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले की घुग्घुस नगर परिषद कार्यालय के अंतर्गत ठेका पद्धति पर कार्यरत कामगारों का वेतन मामला फिलहाल पूरी तरह ठंडे बस्ते में जाता दिखाई दे रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर विषय पर न तो मुख्याधिकारी का कोई ठोस कदम नजर आ रहा है, न ही नगराध्यक्ष, सभापति और नगर सेवकों की ओर से कोई पहल दिखाई दे रही है। इस प्रशासनिक उदासीनता का सीधा खामियाजा मेहनतकश मजदूर वर्ग को भुगतना पड़ रहा है।
नगर परिषद के विभिन्न विभागों में कार्यरत इन ठेका कामगारों का कहना है कि कई महीनों से वेतन समय पर नहीं मिल रहा है। रोजाना शहर की सफाई, पानी व्यवस्था, अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े काम करने वाले ये मजदूर अपने ही हक के पैसे के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। सवाल यह उठता है कि जब नगर परिषद की व्यवस्था इन्हीं कामगारों के श्रम पर चल रही है, तो फिर इनके वेतन को लेकर इतनी लापरवाही क्यों?
जानकारों का मानना है कि यदि मजदूरों का वेतन समय पर नहीं दिया गया है तो नियमों के अनुसार बकाया वेतन के साथ उसका ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज जोड़कर भुगतान किया जाना चाहिए, ताकि मजदूरों को न्याय मिल सके। श्रम कानूनों और मजदूर हितों की रक्षा के लिए बनाए गए लेबर एक्ट के तहत यह स्पष्ट प्रावधान है कि श्रमिकों के वेतन में अनावश्यक देरी करना गंभीर लापरवाही और कानून का उल्लंघन माना जाता है।
सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है। यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या नगर परिषद कार्यालय की ओर से ठेकेदार को समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा है, या फिर भुगतान होने के बावजूद ठेकेदार मजदूरों का वेतन रोककर बैठा है। यदि नगर परिषद की ओर से ठेकेदार को राशि दी जा चुकी है, तो फिर मजदूरों तक वह पैसा क्यों नहीं पहुंचा—यह सवाल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह खड़ा करता है।
मजदूर संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस मामले में सभी पहलुओं की गहन जांच होनी चाहिए और जो भी अधिकारी या ठेकेदार दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ नियमों और श्रम कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
यदि समय रहते इस मामले पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह न केवल मजदूरों के अधिकारों का हनन होगा, बल्कि नगर परिषद प्रशासन की जवाबदेही पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करेगा। जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार अधिकारी तुरंत संज्ञान लें, मजदूरों का बकाया वेतन ब्याज सहित दिलाएं और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए ठोस व्यवस्था सुनिश्चित करें।




