(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस, चंद्रपुर: घुग्घुस नगर परिषद कार्यालय के अंतर्गत वर्ष 2025 में डेली और वीकली बाजार वसूली का टेंडर जारी किया गया था। यह टेंडर कथित तौर पर एक स्थानीय ठेकेदार के परिजनों द्वारा संचालित किया जा रहा है, जिन्हें शहर में कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के करीबी के रूप में देखा जाता है। यही वजह है कि इतने समय बीत जाने के बाद भी इस पूरे मामले में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
शहर के कई जागरूक नागरिकों और व्यापारियों ने नगर परिषद प्रशासन को लिखित निवेदन देकर बाजार वसूली में पारदर्शिता लाने की मांग की थी। लेकिन इन निवेदनों के बावजूद नगर परिषद कार्यालय की ओर से अब तक कोई ठोस कदम उठाया नहीं गया है। बाजार परिसर में न तो वसूली से संबंधित सूचना फलक लगाया गया है और न ही व्यापारियों को निर्धारित दरों के अनुसार पावती या रसीद दी जा रही है।
व्यापारियों का आरोप है कि बिना किसी स्पष्ट दर सूची के मनमानी तरीके से वसूली की जा रही है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर नगर परिषद प्रशासन इस मामले में चुप क्यों है। शहर में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि ठेकेदार और नगर परिषद के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों के बीच कथित साठगांठ के कारण ही यह स्थिति बनी हुई है।
घुग्घुस नगर परिषद में फिलहाल सत्ता कांग्रेस के पास है, जबकि भाजपा विपक्ष में है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या नगराध्यक्ष, वित्त व नियोजन सभापति, आरोग्य सभापति, भाजपा की गठनेता और अन्य नगरसेवक इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेंगे या नहीं।
नगर के नागरिकों का कहना है कि यदि एक सप्ताह के भीतर इस पूरे प्रकरण की जांच कर ठेकेदार, कर विभाग और मुख्याधिकारी की भूमिका की चौकसी नहीं की गई, तो यह साफ संदेश जाएगा कि प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण दोषियों को बचाया जा रहा है।
अब शहर के व्यापारियों और नागरिकों की निगाहें नगर परिषद के जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर टिकी हुई हैं। देखना यह है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं या फिर इस पूरे विवाद को भी अनदेखा कर दिया जाएगा।




