(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस (चंद्रपुर) : नगर परिषद घुग्घुस में जनहित, रोजगार और करदाताओं के पैसे के उपयोग को लेकर एक नया मामला सामने आया है। स्थानीय नागरिक रामचंद्र जोलबाजी टोंगे ने नगर परिषद प्रशासन पर आरोप लगाया है कि उनसे मंडप डेकोरेशन सामग्री उपलब्ध कराने के लिए अनामत राशि लेने के बावजूद उन्हें काम नहीं दिया गया और यह काम किसी अन्य व्यक्ति को सौंप दिया गया।
मिली जानकारी के अनुसार, नगर परिषद घुग्घुस में वर्ष 2025 की सार्वजनिक गतिविधियों के लिए मंडप डेकोरेशन सामग्री किराये पर उपलब्ध कराने हेतु रामचंद्र टोंगे से 14 अक्टूबर 2025 को ₹1000 (पावती क्रमांक 8931) तथा ₹500 (पावती क्रमांक 8930) की अनामत राशि जमा करवाई गई थी। लेकिन आरोप है कि राशि जमा करने के बाद भी उन्हें कोई सूचना दिए बिना संबंधित काम किसी अन्य व्यक्ति को दे दिया गया।
इस संबंध में रामचंद्र टोंगे ने नगर परिषद की नगराध्यक्ष दीप्ति सोनटक्के को लिखित निवेदन देकर मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय लोगों से पैसे लेकर काम नहीं दिया जाता और बाहर के लोगों को काम सौंप दिया जाता है, तो इससे स्थानीय रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ता है और नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होते हैं।
टोंगे ने अपने निवेदन में यह भी मांग की है कि इस पूरे मामले की सखोल जांच कर संबंधित निवडणूक अधिकारी, मुख्याधिकारी, लिपिक, लेखापाल और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों पर उचित कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों और करदाताओं के पैसे का पारदर्शी तरीके से उपयोग हो सके।
यह निवेदन नगर परिषद कार्यालय में दिया गया, उस समय नगराध्यक्ष दीप्ति सोनटक्के, नियोजन व सांस्कृतिक सभापती रवीश विनय सिंग, आरोग्य सभापती नूरुल सिद्दीकी, सूरज कन्नूर और श्रुतिका कलवल सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर परिषद के कामों में पारदर्शिता और स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिलना जरूरी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर जनहित, रोजगार और करदाताओं के पैसे से जुड़ा हुआ मामला है। अब देखना होगा कि नगर परिषद प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।




