प्रणयकुमार बंडी
यवतमाल जिले के वणी तालुका के मुंगोली, साखरा और शिवानी जैसे गांवों में जमीन के नाम पर एक खतरनाक खेल सामने आ रहा है। आरोप है कि कुछ लोग WCL (वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) के नाम पर जमीन जाने का लालच दिखाकर भोले-भाले लोगों को 10×10 के छोटे-छोटे कमरे बेच रहे हैं। इन कमरों में न शौचालय की व्यवस्था है, न पानी का नल, न ही कोई बुनियादी सुविधा—फिर भी इन्हें “भविष्य का निवेश” बताकर ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।
नियमों की खुली धज्जियां
निर्माण और जमीन बिक्री के लिए स्पष्ट नियम होते हैं—जैसे कि NA (नॉन-एग्रीकल्चर) परमिशन, टाउन प्लानिंग मंजूरी, और स्थानीय ग्रामपंचायत की अनुमति। लेकिन यहां बिना किसी वैध अनुमति के अवैध निर्माण कर खुलेआम बिक्री की जा रही है।
नियमों के मुताबिक:
बिना NA परमिशन के कृषि जमीन पर निर्माण गैरकानूनी है. बेसिक सुविधाओं (संडास, पानी, सड़क) के बिना प्लॉट/रूम बेचना नियमों का उल्लंघन है. बिना लेआउट अप्रूवल के बिक्री करना दंडनीय अपराध है.
कार्रवाई क्या हो सकती है?
यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों पर: अवैध निर्माण तोड़ने की कार्रवाई, जुर्माना और आपराधिक केस, जमीन रजिस्ट्रेशन रद्द करने जैसी कठोर कार्रवाई हो सकती है.
जिम्मेदार कौन?
इस पूरे मामले में कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय होती है:
ग्रामपंचायत (सरपंच, सचिव): अवैध निर्माण रोकना और अनुमति देना.
तहसीलदार: जमीन के उपयोग और NA प्रक्रिया की निगरानी.
पंचायत समिति व जिला परिषद सदस्य: स्थानीय विकास और निगरानी.
राजस्व व टाउन प्लानिंग विभाग: लेआउट और निर्माण की वैधता.
‘इनविजिबल लैंड माफिया’ का शक
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह काम किसी संगठित “लैंड माफिया” के इशारे पर हो रहा है, जो पर्दे के पीछे रहकर गरीबों को जाल में फंसा रहा है। बिना रजिस्ट्रेशन, बिना टैक्स भुगतान के इस तरह की बिक्री से सरकार को भी लाखों का राजस्व नुकसान होने की आशंका है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर चल रहे इस कथित घोटाले पर प्रशासन मौन क्यों है? क्या यह मिलीभगत का संकेत है या फिर लापरवाही?
अब क्या करें नागरिक?
जागरूक नागरिकों के पास कई रास्ते हैं: तहसीलदार और जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत. RTI (सूचना का अधिकार) के तहत जानकारी मांगना. लोकायुक्त या एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत. जनहित याचिका (PIL) दायर करना.
वणी के इन गांवों में चल रहा यह कथित “रूम स्कैम” गरीबों के सपनों के साथ खिलवाड़ है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला और बड़ा घोटाला बन सकता है। अब देखना होगा—प्रशासन जागेगा या फाइलों में ही यह मामला दफन कर दिया जाएगा?




