प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : उसगांव के 17 नंबर गेट के पास इन दिनों हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। जहां एक ओर इलाके में स्टील प्लांट के विस्तार का काम युद्ध स्तर पर जारी है और बड़ी संख्या में बाहरी परप्रांतीय कामगार यहां काम के लिए आए हैं, वहीं दूसरी ओर ‘सूखा नशा’ का बढ़ता जाल इन कामगारों के जीवन पर अभिशाप बनता जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इस क्षेत्र में गांजा जैसे नशे का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। कई युवक खुलेआम नशे की हालत में झूमते हुए नजर आते हैं, जिससे न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि किसी भी समय बड़ी अनहोनी की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या घुग्घुस पुलिस और खुफिया तंत्र ने यहां रह रहे कामगारों का पुलिस वेरिफिकेशन किया है? आखिर कितने कामगार और उनके परिवार इस क्षेत्र में रह रहे हैं, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी सामने क्यों नहीं आ रही?
इसके साथ ही पुलिस पाटिल, आजी माजी ग्रामपंचायत सरपंच, सदस्य, जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्य, कृषि उत्पन्न सदस्य की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। क्या उन्हें इस बढ़ते अवैध कारोबार की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है? क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि कुछ असामाजिक तत्व खुलेआम गांजा सप्लाई कर रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
घुग्घुस की DB पुलिस पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कब तक यह अवैध नशे का कारोबार यूं ही चलता रहेगा? क्या स्थानीय पुलिस इस नेटवर्क को तोड़ने में सक्षम है, या फिर चंद्रपुर की LCB (लोकल क्राइम ब्रांच) को हस्तक्षेप कर कार्रवाई करनी पड़ेगी?
कामगारों की सुरक्षा, स्थानीय नागरिकों की शांति और कानून व्यवस्था की साख—तीनों इस समय दांव पर नजर आ रहे हैं। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो उसगांव का यह इलाका किसी बड़े हादसे का केंद्र बन सकता है।
अब सबकी नजरें प्रशासन और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या अवैध नशे के इस जाल पर लगाम लगेगी, या फिर यह मुद्दा भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा?
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