(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस, चंद्रपुर | नगर परिषद की मासिक बैठक से पहले 29 अप्रैल को भाजपा नगरसेवकों द्वारा किया गया ‘एप्रिल फूल’ आंदोलन अब शहर की राजनीति का केंद्र बन गया है। एक ओर विपक्ष ने नगर परिषद पर विकास कार्यों में विफलता का आरोप लगाते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, वहीं सत्तापक्ष ने अगले ही दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन आरोपों को निराधार बताते हुए पलटवार किया।
बुधवार दोपहर करीब 1:30 बजे नगर परिषद कार्यालय परिसर में भाजपा नगरसेवकों ने अनोखे अंदाज में ‘एप्रिल फूल’ आंदोलन किया। सत्ताधारी पक्ष के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि पिछले चार महीनों में एक भी ठोस विकास कार्य नहीं हुआ और शहरवासियों को लगातार “एप्रिल फूल” बनाया जा रहा है। इस दौरान मुख्याधिकारी कार्यालय में ‘एप्रिल फूल बनाया’ गीत बजाकर प्रतीकात्मक विरोध जताया गया और निवेदन सौंपकर नाराजगी व्यक्त की गई।
भाजपा नगरसेवकों का दावा है कि नगर परिषद की लापरवाही से 6 करोड़ रुपये का विकास निधि वापस चला गया। शहर में आरओ मशीनें बंद हैं, पथदिवे खराब हैं, हैंडपंपों की मरम्मत नहीं हुई और सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। साथ ही नियमित मासिक बैठकों के न होने पर भी सवाल उठाए गए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
हालांकि, 30 अप्रैल को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नव सत्तापक्ष ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। सत्ताधारी नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन “दिशाहीन और जनता को भ्रमित करने वाला” है, जो झूठे आरोपों पर आधारित है। उनका कहना है कि भाजपा राज्य में सत्ता में होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर केवल राजनीति कर रही है।
सत्तापक्ष ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि शहर में कई स्थानों पर शासकीय जमीनों पर अवैध अतिक्रमण किया गया है और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है। यहां तक कि कुछ प्रकल्पों का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किए जाने का भी दावा किया गया, जिससे शासन और जनता दोनों को “एप्रिल फूल” बनाया जा रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी स्पष्ट किया गया कि कई समस्याएं पूर्ववर्ती कार्यकाल की देन हैं, जिनका समाधान अब चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। अमराई और उडिया मोहल्ला क्षेत्र में बंद पड़ी सार्वजनिक सुविधाओं की मरम्मत शुरू कर दी गई है, जबकि शहर में सीमेंट कंक्रीट नालियों का निर्माण कार्य भी प्रारंभ हो चुका है।
मुख्याधिकारी निलेश रंजनकर के निर्देशानुसार लगभग 1 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की प्रक्रिया शुरू होने का दावा किया गया। पानी की समस्या को लेकर नगर परिषद द्वारा फिलहाल 5 वाटर टैंकर संचालित किए जा रहे हैं, जिन्हें जल्द बढ़ाने की योजना है। साथ ही कचरा संकलन व्यवस्था को मजबूत करने पर भी काम जारी है।
सत्तापक्ष ने यह भी माना कि शहर की पुरानी जल आपूर्ति योजना जर्जर हो चुकी है, जिसके कारण बार-बार पाइपलाइन फूटने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। इसके स्थायी समाधान के लिए नई जल योजना पर काम शुरू किया गया है।
वहीं, उड़ान पुल, WCL क्षेत्र में स्वच्छता और प्रदूषण जैसे मुद्दों पर पूछे गए सवालों के जवाब में नगर परिषद पदाधिकारियों ने बताया कि संबंधित विभागों और अधिकारियों के साथ बैठकें की गई हैं और 15 से 20 दिनों में ठोस निर्णय लेने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, ‘एप्रिल फूल’ आंदोलन ने घुग्घुस की राजनीति को गरमा दिया है। एक ओर विपक्ष नगर परिषद को विफल बता रहा है, तो दूसरी ओर सत्तापक्ष इसे राजनीतिक स्टंट करार देते हुए विकास कार्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जता रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह सियासी टकराव शहर के वास्तविक विकास पर कितना असर डालता है।




