Wednesday, June 17, 2026

Breathe of Life Multipurpose Society UCO BANK- A/C- 09110110049020, IFSC : UCBA0000911, MICR CODE : 442028501

spot_img
spot_img

₹14 लाख की नाली पर उठे गंभीर सवाल: क्या स्वीकृत योजना छोड़कर बदला गया निर्माण स्थल?

प्रणयकुमार बंडी

घुग्घूस, चंद्रपुर | घुग्घूस नगर परिषद के अंतर्गत शालिग्राम नगर में लगभग ₹14.27 लाख की लागत से स्वीकृत सी.सी. कवर्ड नाली निर्माण कार्य अब विवादों के घेरे में आ गया है। स्थानीय नागरिक राकेश मल्लय्या कलवल ने मुख्याधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं, तकनीकी त्रुटियों और स्वीकृत मार्ग से कार्य को कथित रूप से डायवर्ट किए जाने का आरोप लगाया है।

शिकायत के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में “Construction of CC Covered Drain from House of Sisaiyya to Sanju Kalwal (170 Meter), Shaligram Nagar” नामक कार्य को मंजूरी दी गई थी। लेकिन वास्तविक स्थिति स्वीकृत इस्टीमेट से मेल नहीं खाती। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिस मार्ग पर 170 मीटर नाली का निर्माण होना था, वहां कार्य अधूरा छोड़ दिया गया और नाली का रूट बदलकर अन्य स्थान पर निर्माण कर दिया गया।

जनता के पैसे से खिलवाड़?

राकेश कलवल का कहना है कि नाली का निर्माण स्वीकृत योजना के अनुरूप नहीं होने से जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। यदि मानसून के दौरान पानी का प्रवाह बाधित हुआ तो क्षेत्र में जलभराव और नागरिकों की परेशानी बढ़ सकती है। उन्होंने सवाल उठाया है कि आखिर किसके निर्देश पर स्वीकृत मार्ग को बदलकर दूसरे स्थान पर निर्माण किया गया?

लाखों का बजट, फिर भी सवालों के घेरे में गुणवत्ता

शिकायत में उल्लेखित दस्तावेजों के अनुसार इस कार्य के लिए ₹14,27,140 की स्वीकृति दी गई है। इसमें निर्माण लागत, टेस्टिंग, रॉयल्टी, बीमा और जीएसटी सहित विभिन्न मदों में खर्च दर्शाया गया है। साथ ही M-20 स्लैब, M-15 कट-ऑफ वॉल, वीप होल्स, बेड ब्लॉक, पीसीसी और सोलिंग जैसे तकनीकी घटकों का भी उल्लेख है।

इसके बावजूद शिकायतकर्ता का आरोप है कि कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों को लेकर गंभीर संदेह उत्पन्न हो रहे हैं। यदि स्वीकृत मानकों का पालन नहीं हुआ है तो यह सीधे तौर पर सार्वजनिक धन के उपयोग पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

जांच की मांग, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग

शिकायत में नगर परिषद प्रशासन से मांग की गई है कि स्वीकृत इस्टीमेट और वास्तविक निर्माण स्थल का मिलान किया जाए, नाली का मार्ग क्यों बदला गया इसकी जांच हो, कार्य की गुणवत्ता और माप की तकनीकी जांच कराई जाए तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी, कर्मचारी, ठेकेदार और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

अब प्रशासन की परीक्षा

इस मामले की प्रतिलिपि कलेक्टर चंद्रपुर, नगर परिषद अध्यक्ष, बांधकाम सभापति, अकाउंटेंट तथा मीडिया प्रतिनिधियों को भी भेजी गई है। ऐसे में अब निगाहें नगर परिषद प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वास्तव में स्वीकृत योजना से हटकर निर्माण किया गया है, या फिर कागजों और जमीन की हकीकत में बड़ा अंतर है? यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल निर्माण की गुणवत्ता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग और जवाबदेही का भी बड़ा मुद्दा बन सकता है।

spot_img

Pranaykumar Bandi

WhatsApp No - 9112388440
WhatsApp No - 9096362611
Email id: vartamanvarta1@gmail.com

RELATED ARTICLES
Today News

Breaking News

Crime News