मुंबई : ढाई महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी मणिपुर सुलग रहा है. हिंसा में कई निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के बाद भी राज्य में शांति स्थापित नहीं हो पाई है. फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो हम सभी की भारतीयता को कलंकित कर रहे हैं. इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हेमंत पाटिल ने शनिवार को अफसोस जताया कि नारी शक्ति का ढिंढोरा पीटने वाले देश में महिलाएं कितनी असुरक्षित हैं, इसका उदाहरण इस ताजा घटना में एक बार फिर देखने को मिला है. पाटिल ने यह भी मांग की कि प्रधानमंत्री मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाएं, जो हिंसा पर अंकुश लगाने और ‘राजधर्म’ का पालन करने में विफल रहे.

पाटिल ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने पिछले 83 दिनों से इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है जब मणिपुर में हिंसा भड़की हुई थी. भारत का दिल दर्द और गुस्से से भरा है. मणिपुर की घटना किसी भी सभ्य समाज और उस देश के लिए बहुत शर्मनाक बात है जो अपनी संस्कृति और सभ्यता के लिए जाना जाता है. पाटिल ने कहा, विशेष रूप से, भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार के बावजूद, केंद्र और राज्य सरकारें हिंसा को रोकने और मैताई-कुकी भाइयों के बीच सामंजस्य बिठाने में पूरी तरह से विफल रही हैं.
केंद्र और राज्य सरकार की लापरवाही के कारण मणिपुर में हुई हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना पड़ा. जब कोई राज्य जल रहा होता है तो कोर्ट उस पर संज्ञान लेता है और उचित कार्रवाई का निर्देश देता है, इससे पता चलता है कि सरकार ‘राजधर्म’ का पालन करने में विफल हो रही है. मणिपुर में कई दिनों से मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि धीरे-धीरे अत्याचार के ऐसे कई मामले सामने आएंगे. पाटिल ने राय व्यक्त की कि यदि सरकार तय समय में उचित कदम नहीं उठाती है तो इस मामले में न्यायालय का सीधा हस्तक्षेप मणिपुर को न्याय देने जैसा होगा.




