प्रणयकुमार बंडी
घुग्घूस/चंद्रपुर: घुग्घूस नगर परिषद क्षेत्र में घुग्घूस बस स्टॉप के सामने छत्रपति शिवाजी महाराज चौक के पास स्थित पानी की टंकी की जर्जर हालत अब लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। टंकी का प्लास्टर जगह-जगह से उखड़कर गिर रहा है और निर्माण में इस्तेमाल किया गया सरिया व लोहे के हिस्से खुलेआम दिखाई दे रहे हैं। यह स्थिति न केवल सरकारी निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि कामगारों और आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी बड़ा खतरा पैदा कर रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि टंकी के आसपास प्रतिदिन मजदूरों और नागरिकों की आवाजाही रहती है। यदि प्लास्टर या कोई अन्य हिस्सा अचानक गिरता है तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद नगर परिषद प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से अब तक मरम्मत की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाता दिखाई नहीं दे रहा है।
जनता का आरोप है कि जब करोड़ों रुपये की जल योजनाओं और विकास कार्यों के दावे किए जाते हैं, तब वर्षों पुरानी और जर्जर हो चुकी इस पानी की टंकी की सुध क्यों नहीं ली जा रही? नागरिकों ने सवाल उठाया है कि वर्तमान सत्ता पक्ष के नगराध्यक्ष, पानी पुरवठा सभापति, नियोजन एवं टाउन प्लानिंग सभापति, बांधकाम सभापति, मुख्याधिकारी और संबंधित इंजीनियर आखिर इस गंभीर मामले पर कब ध्यान देंगे? अमृत जल योजना के तहत अधूरे कार्य कब पूरे होंगे और इस खतरनाक टंकी की मरम्मत आखिर कब शुरू होगी?
लोगों का यह भी कहना है कि यदि नगर परिषद कार्यालय में नया प्रशासनिक ढांचा स्थापित होने से पहले ही इस खतरे को दूर कर दिया जाता तो आज मजदूरों और आम नागरिकों की जान पर संकट नहीं मंडराता। प्रशासन की लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता को लेकर क्षेत्र में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
कानून व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से भी यह मामला गंभीर माना जा रहा है। यदि संभावित खतरे की जानकारी होने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं की जाती और भविष्य में कोई दुर्घटना होती है, तो जिम्मेदारी तय होना स्वाभाविक होगा। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही और सरकारी लापरवाही पर भी कानूनी प्रश्न खड़े हो सकते हैं।
कामगारों की सुरक्षा, जनहित और पेयजल व्यवस्था जैसे संवेदनशील मुद्दों पर प्रशासन की निष्क्रियता अब राजनीतिक बहस का विषय भी बनती जा रही है। नागरिकों का कहना है कि विकास केवल घोषणाओं और योजनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की पहली जिम्मेदारी है।
खबर लिखे जाने तक इस संबंध में नगर परिषद प्रशासन अथवा संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी। आधिकारिक जानकारी प्राप्त होते ही उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।




