प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : जिले के सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्रों में शामिल घुग्घुस शहर एक बार फिर पर्यावरण, प्रशासनिक जवाबदेही और औद्योगिक गतिविधियों को लेकर चर्चा में आ गया है। नगर परिषद के आरोग्य सभापति तथा नगरसेवक नुरूल सिद्दीकी ने जिल्हाधिकारी चंद्रपुर को लिखित निवेदन देकर लॉयड्स मेटल्स कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि कंपनी ने शेनगांव शिव मार्ग क्षेत्र में किसानों की अनुमति लिए बिना ट्रक पार्किंग एवं भारी वाहनों की आवाजाही के लिए सीमेंट-कंक्रीट सड़क का निर्माण कराया तथा 40 से अधिक बड़े पेड़ों की कथित रूप से अवैध कटाई कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया।
नगरसेवक द्वारा सौंपे गए निवेदन में कहा गया है कि घुग्घुस पहले से ही प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में यदि किसी औद्योगिक कंपनी द्वारा अपने व्यावसायिक हितों के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई की जाती है, तो यह केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं बल्कि स्थानीय नागरिकों और किसानों के अधिकारों के लिए भी गंभीर विषय है।
किसानों की जमीन तक पहुंच पर संकट?
निवेदन के अनुसार कंपनी ने कथित रूप से शिव मार्ग का उपयोग ट्रक पार्किंग और भारी वाहनों के आवागमन के लिए करना शुरू किया है। किसानों का दावा है कि इस मार्ग पर अब बड़े वाहनों की आवाजाही बढ़ने से उनके खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। साथ ही खेतों में जाने वाले ग्रामीणों और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है।
आरोप यह भी है कि सड़क के किनारे गहरा नाला निर्मित किए जाने से किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने में अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति ली गई थी और क्या स्थानीय हितधारकों की सहमति प्राप्त की गई थी?
प्रशासनिक विभागों की भूमिका पर भी सवाल
मामले ने अब केवल कंपनी तक सीमित न रहकर प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों के बीच चर्चा है कि यदि वास्तव में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और निर्माण कार्य हुए हैं, तो जिला प्रशासन, तहसील कार्यालय, राजस्व विभाग, पटवारी, वन विभाग, नगर परिषद, प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभाग तथा अन्य संबंधित शासकीय एजेंसियों को इसकी जानकारी थी या नहीं?
यदि जानकारी थी, तो क्या आवश्यक अनुमतियां दी गई थीं? और यदि जानकारी नहीं थी, तो इतने बड़े स्तर पर कार्य होने के बावजूद निगरानी तंत्र की निष्क्रियता पर भी सवाल उठना लाजिमी है।
कार्रवाई की मांग, एफआईआर दर्ज करने की मांग भी
नगरसेवक नुरूल सिद्दीकी ने अपने निवेदन में मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कथित अवैध निर्माण और वृक्षों की कटाई के मामले में अपराध दर्ज करने की भी मांग की है।
पहले भी कंपनी के खिलाफ हुआ था आंदोलन
गौरतलब है कि इससे पहले भी एक निर्वाचित नगरसेवक द्वारा कंपनी से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर नगर परिषद कार्यालय परिसर में 24 घंटे से अधिक समय तक धरना आंदोलन किया गया था। उस समय प्रशासन और संबंधित पक्षों द्वारा लगभग 15 दिनों में समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिए जाने के बाद आंदोलन वापस लिया गया था।
हालांकि सूत्रों का दावा है कि उस दौरान किए गए आश्वासनों का पूर्ण पालन अब तक नहीं हुआ है। ऐसे में क्षेत्र में फिर से आंदोलन की चर्चा तेज हो गई है। यदि शिकायतों का समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक राजनीतिक तथा जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
जवाब का इंतजार
खबर लिखे जाने तक लॉयड्स मेटल्स कंपनी, जिला प्रशासन, तहसील प्रशासन, वन विभाग अथवा अन्य संबंधित विभागों की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। संबंधित पक्षों का जवाब प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मामला केवल एक सड़क या कुछ पेड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, किसानों के अधिकार, प्रशासनिक पारदर्शिता और औद्योगिक जवाबदेही से जुड़ा विषय है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।




