Friday, June 12, 2026

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लाखों की लागत से बना लोकमान्य तिलक उद्यान बदहाली का शिकार, तत्कालीन ग्रामपंचायत और वर्तमान नगर परिषद पर उठे गंभीर सवाल

प्रणयकुमार बंडी

घुग्घुस, चंद्रपुर : प्रभाग क्रमांक 11 स्थित तिलक नगर का लोकमान्य तिलक उद्यान आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाता नजर आ रहा है। कभी क्षेत्र के सौंदर्यीकरण और बच्चों के मनोरंजन के उद्देश्य से लाखों रुपये खर्च कर विकसित किया गया यह उद्यान अब उपेक्षा, लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन गया है। स्थानीय नागरिकों ने उद्यान को बचाने के लिए नगर परिषद प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, तत्कालीन विधायक सुधीर मुनगंटीवार के माध्यम से मंजूर इस परियोजना के तहत तिलक नगर की खुली जगह के सौंदर्यीकरण के लिए लगभग 53.70 लाख रुपये खर्च किए गए थे। उद्यान का लोकार्पण 25 अगस्त 2020 को बड़े उत्साह के साथ किया गया था। उस समय भाजपा के जिला अध्यक्ष, जिला परिषद पदाधिकारी, पंचायत समिति सदस्य, ग्रामपंचायत प्रतिनिधि तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में इस परियोजना को क्षेत्र के विकास की बड़ी उपलब्धि बताया गया था।

लेकिन छह वर्ष बाद स्थिति बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। उद्यान में बच्चों के खेलकूद के लिए लगाए गए कई उपकरण टूट चुके हैं, जबकि अनेक उपकरण रखरखाव के अभाव में बेकार होते जा रहे हैं। उद्यान में लगाए गए पेड़-पौधे पर्याप्त देखभाल न मिलने से सूख चुके हैं। चारों ओर फैली कंटीली झाड़ियों ने पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया है। बरसात के दिनों में उद्यान का बड़ा हिस्सा पानी से भरकर झील जैसा दिखाई देता है, जिससे नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सबसे चिंताजनक विषय उद्यान परिसर में खुला पड़ा विद्युत बॉक्स है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विद्युत विभाग और नगर प्रशासन की लापरवाही के कारण यह बॉक्स लंबे समय से खुला पड़ा है, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की जा रही है।

तिलक नगर निवासी महाकाली मनमोहन उर्फ वंशी ने बताया कि उन्होंने कई बार नगर प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि प्रभाग के जनप्रतिनिधि भी इस उद्यान की स्थिति को लेकर गंभीर दिखाई नहीं दे रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि जब लाखों रुपये खर्च कर उद्यान का निर्माण किया गया था तो उसके नियमित रखरखाव की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? यदि तत्कालीन ग्रामपंचायत ने परियोजना का निर्माण कराया था तो उसके संरक्षण की दीर्घकालीन योजना कहां थी? वहीं, ग्रामपंचायत से नगर परिषद बनने के बाद भी वर्तमान नगर परिषद प्रशासन इस सार्वजनिक संपत्ति को बचाने में क्यों विफल रहा?

नागरिकों का आरोप है कि विकास कार्यों का उद्घाटन और प्रचार तो बड़े स्तर पर किया जाता है, लेकिन बाद में उनकी देखभाल की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं होता। परिणामस्वरूप जनता के टैक्स से निर्मित करोड़ों और लाखों रुपये की परिसंपत्तियां धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो जाती हैं।

तिलक नगरवासियों ने मांग की है कि लोकमान्य तिलक उद्यान की तत्काल मरम्मत कर उसे फिर से विकसित किया जाए, सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, सूखे पौधों के स्थान पर नए पौधे लगाए जाएं, झाड़ियों की सफाई कराई जाए तथा उद्यान की बदहाली के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

अब देखने वाली बात यह होगी कि तत्कालीन ग्रामपंचायत द्वारा विकसित और वर्तमान नगर परिषद के अधीन यह उद्यान प्रशासन की नींद कब खोलता है, या फिर जनता के टैक्स से बना यह सार्वजनिक उद्यान इसी तरह बदहाली की भेंट चढ़ता रहेगा।

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