प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : भीषण जलसंकट से परेशान प्रभाग क्रमांक 03 और प्रभाग क्रमांक 11 के महिला-पुरुषों का आक्रोश आखिरकार मंगलवार (02 जून 2026) को सड़कों पर फूट पड़ा। सैकड़ों नागरिकों ने सीधे घुग्घुस नगर परिषद कार्यालय पहुंचकर मुख्याधिकारी, नगराध्यक्ष और उपाध्यक्ष का घेराव किया तथा नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
घेराव के दौरान मुख्याधिकारी के कक्ष में पहुंचे नागरिकों, विशेषकर महिलाओं ने प्रशासन, जलापूर्ति विभाग तथा सत्तापक्ष-विपक्ष के जनप्रतिनिधियों की तीखी आलोचना की। महिलाओं ने आरोप लगाया कि वार्डों में पिछले 4 से 6 दिनों से गंभीर जलसंकट बना हुआ है। नलों में पर्याप्त दबाव नहीं होने के कारण लोगों को नालियों और गड्ढों के पास जमा पानी जैसी परिस्थितियों में संघर्ष कर पानी भरना पड़ रहा है।
नागरिकों ने बताया कि तिलक नगर जैसे क्षेत्रों में वर्षों बाद ऐसी स्थिति पैदा हुई है, जहां बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग घंटों कतारों में खड़े होकर पानी भरने को मजबूर हैं। लोगों का कहना था कि नगर परिषद नियमित रूप से लगभग 1200 रुपये जलकर वसूलती है, लेकिन बदले में सुचारू जलापूर्ति देने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
घेराव के दौरान महिलाओं ने दो टूक कहा कि नगर परिषद कार्यालय में जनता के काम कम और राजनीति ज्यादा हो रही है। वार्डों की समस्याओं के समाधान के लिए चुने गए नगरसेवक और नगरसेविकाएं केवल आश्वासन देते दिखाई दे रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।
जनता का सवाल: जिम्मेदार कौन?
नागरिकों का कहना है कि जब पानी जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है तो फिर जलापूर्ति सभापति, नगराध्यक्ष, नगरसेवक और नगरसेविकाओं की जिम्मेदारी आखिर क्या है? जनता ने सवाल उठाया कि हर बार तकनीकी अड़चनों का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से बचना उचित नहीं है।
लोगों का आरोप है कि जब संकट आता है तो अधिकारी तकनीकी कारणों का हवाला देते हैं, जबकि जनप्रतिनिधि प्रशासन को दोषी ठहराते हैं। इस आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति के बीच सबसे ज्यादा परेशानी आम नागरिकों को उठानी पड़ रही है।
निरीक्षण के लिए पहुंचे अधिकारी
जनाक्रोश को देखते हुए मुख्याधिकारी, नगराध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा अन्य पदाधिकारी बाद में प्रभाग क्रमांक 03 में स्पॉट निरीक्षण के लिए पहुंचे। अधिकारियों ने दावा किया कि सभी वार्डों के लिए पानी के टैंकरों की व्यवस्था की गई है और फोन पर भी सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। उनके अनुसार कुछ तकनीकी बाधाओं के कारण जलापूर्ति प्रभावित हुई थी, जिसे जल्द ही सुचारू कर दिया जाएगा।
समाधान चाहिए, बहाने नहीं
जलसंकट जैसी गंभीर समस्या में जनता को राजनीतिक बयानबाजी नहीं बल्कि ठोस समाधान चाहिए। जलापूर्ति सभापति की जिम्मेदारी व्यवस्था की सतत निगरानी करना है, नगराध्यक्ष और प्रशासन का दायित्व समन्वय स्थापित कर संकट का त्वरित समाधान करना है, जबकि नगरसेवकों और नगरसेविकाओं का कर्तव्य अपने-अपने वार्डों की समस्याओं को समय रहते प्रशासन तक पहुंचाकर उनका निराकरण सुनिश्चित करना है।
आज घुग्घुस की जनता का गुस्सा केवल पानी के लिए नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ दिखाई दिया जो वर्षों से समस्याओं का स्थायी समाधान खोजने के बजाय जिम्मेदारियां एक-दूसरे पर डालने में व्यस्त नजर आती है। यदि समय रहते जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो यह जनाक्रोश आने वाले दिनों में और अधिक उग्र रूप ले सकता है।




