प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर: भीषण गर्मी और लगातार जलसंकट से परेशान प्रभाग क्रमांक 03 के महिला एवं पुरुष बुधवार को घुग्घुस नगर परिषद कार्यालय पहुंच गए और मुख्याधिकारी, नगराध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष का घेराव कर अपना तीव्र आक्रोश व्यक्त किया। कई दिनों से पानी की आपूर्ति बाधित रहने से नाराज नागरिकों ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए भटक रही है, जबकि नगर परिषद में समस्याओं के समाधान से अधिक राजनीति दिखाई दे रही है।
मुख्याधिकारी के कक्ष में बड़ी संख्या में पहुंची महिलाओं ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि प्रभाग क्रमांक 03 में पिछले 5 से 6 दिनों से गंभीर जलसंकट बना हुआ है। कई घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है और कुछ स्थानों पर पाइपलाइन में पानी आने के बजाय केवल हवा चल रही है। नागरिकों का आरोप था कि समय पर शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
आक्रोशित महिलाओं ने कहा कि जनता नियमित रूप से पानी कर भर रही है, लेकिन बदले में उन्हें पर्याप्त और नियमित जलापूर्ति नहीं मिल रही है। यदि नगर परिषद नागरिकों से कर वसूल सकती है तो मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना भी उसकी जिम्मेदारी है। महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि नगर परिषद कार्यालय में विकास कार्यों की अपेक्षा राजनीतिक खींचतान अधिक चल रही है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
नागरिकों ने सवाल उठाया कि जब वार्ड की समस्याओं के समाधान के लिए नगरसेवक और नगरसेविकाओं को चुना गया है तो फिर जलसंकट जैसी गंभीर समस्या पर उनकी सक्रियता क्यों दिखाई नहीं दे रही? जनता ने जनप्रतिनिधियों से केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई की मांग की।
घेराव और तीखी बहस के बाद मुख्याधिकारी, नगराध्यक्ष, उपनगराध्यक्ष तथा संबंधित अधिकारियों ने मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने दावा किया कि जलापूर्ति में आई तकनीकी बाधाओं को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है तथा सभी वार्डों के लिए टैंकर व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है। नागरिकों को फोन के माध्यम से टैंकर सेवा उपलब्ध कराने की बात भी कही गई। प्रशासन का कहना है कि तकनीकी समस्याओं का समाधान होने के बाद जलापूर्ति जल्द सामान्य हो जाएगी।
जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार पदाधिकारियों की क्या होनी चाहिए भूमिका?
जलसंकट जैसी स्थिति में पानी पुरवठा सभापति की जिम्मेदारी केवल बैठकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जलापूर्ति व्यवस्था की नियमित निगरानी, शिकायतों का त्वरित निराकरण और नागरिकों के साथ सतत संवाद भी आवश्यक है।
नगराध्यक्ष को नगर परिषद के सर्वोच्च निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में प्रशासन और जनता के बीच समन्वय स्थापित कर संकट की स्थिति में तत्काल निर्णय लेने चाहिए।
नगरसेवक और नगरसेविकाओं का दायित्व है कि वे अपने-अपने वार्डों की समस्याओं को प्राथमिकता दें, नियमित रूप से क्षेत्र का दौरा करें और नागरिकों की शिकायतों को प्रशासन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाएं। केवल चुनाव के समय सक्रियता दिखाना पर्याप्त नहीं है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि जलसंकट की समस्या कई दिनों से बनी हुई थी तो उसे पहले ही क्यों नहीं सुलझाया गया? जनता को सड़क पर उतरकर नगर परिषद कार्यालय का घेराव करने की नौबत क्यों आई? इन सवालों के जवाब और जलापूर्ति की वास्तविक स्थिति पर अब पूरे शहर की नजर बनी हुई है।




